सुभद्रा कुमारी चौहान की जीवनी। Biography of Subhadra Kumari Chauhan

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हमारी भारत भूमि पर बहुत से प्रसिद्ध कवियों ( Famous poets ) का जन्म हुआ है। सब ने अपनी अलग-अलग पहचान बनाई है, उनमे से ही एक प्रसिद्ध भारतीय कवि subhadra kumari chauhan भी थी।

सुभद्रा कुमारी चौहान मुख्य रूप से वीर रस में रचित हिंदी कविताओं के लिए प्रसिद्ध भारतीय कवि थीं, जो हिंदी कविता के नौ रसों में से एक हैं। 

दोस्तों, आज हम आपके लिए famous indian poet सुभद्रा कुमारी चौहान जी की biography and life story लेकर आए है। सुभद्रा कुमारी चौहान Poet and freedom fighter थी।

Subhadra kumari chauhan जी को 2 बार जेल भी जाना पड़ा जब वह British rule in 1923 and 1942 ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता आज तक लोग पढना पसंद करते है। 

उनकी सबसे लोकप्रिय कविताओं ( famous poems ) में से एक है “झाँसी की रानी” है। जिसमें बहादुर झांसी की रानी, ​​लक्ष्मी बाई के जीवन का वर्णन किया गया है।

उनकी कविता ‘झाँसी की रानी’ ने लोगों के मन मे अपनी जगह बना ली है। एक इसी कविता के बल पर वे हिंदी साहित्य में अमर हो गई हैं भारत सरकार ने उनकी याद में एक भारतीय तट रक्षक जहाज ( indian coast guard ship ) का नाम रखा है।

सुभद्रा कुमारी का प्रारंभिक जीवन: – Initiation life of Subhadra Kumari Chauhan

सुभद्रा कुमारी चौहान एक कवि और स्वतंत्रता सेनानी थीं। उनका जन्म नागपंचमी के दिन 16 अगस्त 1904 को इलाहाबाद के पास निहालपुर गाँव में हुआ था।

वह एक मध्यम वर्गीय राजपूत परिवार से थी उनके पिता, ठाकुर राम नाथ सिंह, एक सख्त अनुशासक थे,लेकिन उनके बड़े भाई राज बहादुर सिंह ने परिवार की परंपराओं को चुनौती दी, और सुभद्रा कुमारी को इलाहाबाद के क्रॉसहाइट गर्ल्स स्कूल में शिक्षित करने में कामयाब रहे। 

सुभद्रा कुमारी की काव्य प्रतिभा बचपन में ही सामने आ गई थी। 9 वर्ष की आयु में उन्होनें अपनी पहली कविता लिखी थी उनकी पहली कविता प्रयाग से निकलने वाली पत्रिका ‘मर्यादा’ में प्रकाशित हुई थी।

सुभद्रा की पढ़ाई नवीं कक्षा के बाद छूट गई थी। शिक्षा समाप्त करने के बाद नवलपुर के सुप्रसिद्ध ‘ठाकुर लक्ष्मण सिंह’ के साथ इनका विवाह 15 वर्ष की आयु में ही हो गया था।

सुभद्रा कुमारी का करियर: – Career of Subhadra Kumari Chauhan

1921 में, सुभद्रा कुमारी चौहान और उनके पति महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए। वह पहली महिला सत्याग्रही थीं, जिन्होंने 1923 में ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण दो बार जेल में गिरफ्तारी की थी। 

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सुभद्रा कुमारी का लेखन करियर: – Writing career of Subhadra Kumari Chauhan

सुभद्रा कुमारी ने हिंदी कविता में कई लोकप्रिय रचनाएँ लिखी हैं। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना झांसी की रानी है, जो भावनात्मक रूप से एक कविता है जो रानी लक्ष्मी बाई के जीवन का वर्णन करती है। कविता हिंदी साहित्य में सबसे ज्यादा पढ़ी और गाई जाने वाली कविताओं में से एक है। 

झाँसी (ब्रिटिश भारत) की रानी के जीवन और 1857 की क्रांति के बारे अक्सर भारत के स्कूलों में पढ़ाया जाता है। 

सुभद्रा कुमारी अन्य कविताएँ, वीरन की कहानी हो बसंत, राखी की चुनुती और विदा, स्वतंत्रता आंदोलन के बारे में खुलकर बात करती हैं। 

कहा जाता है कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के लिए उन्होंने बड़ी संख्या में भारतीय युवाओं को प्रेरित किया। यहाँ झाँसी की रानी का प्रारंभिक श्लोक है:-

सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,

बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी,

गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,

दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।

 चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी,

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा लिखी गई कविताओं और गीतों ने इतने सारे भारतीय युवाओं को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरणा के स्रोत के रूप में काम किया है। 

उन्होंने अपने लेखन में मुख्य रूप से हिंदी की सरल और स्पष्ट खड़ी बोली का इस्तेमाल किया। इनके अलावा, चौहान बच्चों के लिए कविताएँ भी लिखते थे। उसने मध्यमवर्गीय भारतीयों की जीवनशैली पर आधारित कई लघु कथाएँ लिखी हैं।

देखो कोयल काली है पर

मीठी है इसकी बोली

इसने ही तो कूक कूक कर

आमों में मिश्री घोली

कोयल कोयल सच बतलाना

क्या संदेसा लायी हो

बहुत दिनों के बाद आज फिर

इस डाली पर आई हो

क्या गाती हो किसे बुलाती

बतला दो कोयल रानी

प्यासी धरती देख मांगती

हो क्या मेघों से पानी?

सुभद्रा कुमारी चौहान की रचनाएँ:- Collections of poems Subhadra Kumari 

उन्होंने लगभग 88 कविताओं और 46 कहानियों की रचना की।

– अनोखा दान 

– आराधना 

– इसका रोना 

– उपेक्षा

– उल्लास 

– कलह-कारण 

– कोयल 

– कठिन प्रयत्नों से सामग्री 

– खिलौनेवाला

– गिरफ़्तार होने वाले हैं

– चलते समय 

– चिंता 

– जलियाँवाला बाग में बसंत 

– जीवन-फूल 

– झांसी की रानी 

– झाँसी की रानी की समाधि पर 

– झिलमिल तारे

– ठुकरा दो या प्यार करो तुम 

– तुम मानिनि राधे 

 सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा लिखी गई कविताओं और कहनियाँ है जो आज भी लोगों को अपनी और मोह लेती है

सुभद्रा कुमारी चौहान की मृत्यु:- Death of Subhadra Kumari Chauhan

1948 में सिवनी मप्र के पास एक कार दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। सीपी की राजधानी नागपुर से जबलपुर लौटने पर, जहाँ वह विधानसभा सत्र में भाग लेने के लिए गई थीं। वह राज्य की विधान सभा की सदस्य थीं।

तटरक्षक जहाज और प्रतिमा:- Coast Guard ship and statue 

सुभद्रा कुमारी चौहान के याद में एक भारतीय तटरक्षक जहाज का नाम रखा गया था। मध्य प्रदेश सरकार ने जबलपुर के नगर निगम कार्यालय के समक्ष सुभद्रा कुमारी चौहान की एक प्रतिमा लगाई।

Subhadra Kumari Chauhan

जन्म: 16 अगस्त1904, प्रयागराज

निधन: 15 फरवरी 1948, सिवनी

पति या पत्नी: ठाकुर लक्ष्मण सिंह चौहान (1919-1948)

भाषा: हिंदी

अवधि: 1904-1948

पुस्तकें: बिखरे हुए मोती, अधिक

बच्चे: सुधा चौहान, अशोक चौहान, विजय चौहान, अजय चौहान, ममता चौहान


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धन्यवाद!

by Mehak Gupta

Lifewingz Team

 

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