Nari par kavita aur Beti bachao beti padhao pe poem

 

क्यों कहते है – जय माता दी ?

मुझे है, फेंका,

मुझे है रोंदा,

मुझे है बेचा,

ये क्यों भूल जाते हैं इंसान,

कि मुझसे ही तो उनका अस्तित्व है।। ?

फेंकते हुए दर्द नहीं आता।

रोंदते हुए घिन नहीं अती।

बचते हुए शर्म नहीं आती।

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तो क्यों कहते है, जय माता दी,

माता भी तो एक स्त्री है,

इंसान जब ना करे किसी स्त्री की क़दर, ?

उसे कोई हक नहीं माता का नाम पुकारने का।।

क्या गलती है मेरी,

जो हुआ इंसान ऐसा शैतान,

ये असीम गुनाह कर के भी,

कैसे खुद से निगाह मिला पाता है इंसान।

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आज के दौर में कहाँ हैं लड़कियां,

लड़कों से कम,

हर क़दम कंधा मिलाए खड़ीं हैं लड़कियां,

तब भी हम हमें अबला नारी क्यों कहते हैं,

हमें भी वो समान दर्जा दो।

लेकिन,

मुझे है फेंका।

मुझे है रोंदा।

मुझे है बेचा।?

 


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by Shubhi Gupta ( शुभी गुप्ता )
Story and Poem Writer

 

 

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