गरीब बुढ़िया की खीर का जादू – Jadu ki Kahani – Magic Story in Hindi

jadu ki kahani

दोस्तों!  ये एक jadu ki kahani ( magic story in hindi ) एक रोचक कहानी है जो दादी की कहानियों( dadimaa ki kahaniya ) में से एक है! 

एक समय की बात है। एक गांव में एक गरीब बुढ़िया रहती थी, वह पूरी तरह से अकेले रहा करती थी। उसका कोई भी नहीं था, ना बाल बच्चे ना कोई रिश्तेदार, सुबह शाम लोगों के छोटे-मोटे काम किया करती थी। जिसके बदले लोग उसको पैसे, अनाज या खाने पीने का सामान दे दिया करते थे। जिसको खा पीकर वह अपना जीवन बिताया करती थी।

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वह अपने जीवन में पूरी तरह से संतुष्ट थी उसे भगवान से किसी प्रकार का कोई गिला भी नहीं था। दूसरों के सामान के कारण बुढ़िया का घर पूरी तरह से सामानों से भरा हुआ था , एक बार की बात है वे अपने घर को खोलकर घर के सामान को धूप दिखा रही थी।

समय वहां से दो चोर जा रहे थे, जब उन्होंने देखा कि बुढ़िया के घर में तरह-तरह का सामान भरा हुआ है तो उन्हें बड़ा लालच आया और वे सोचने लगे कि :-

“इस घर में तो बुढ़िया अकेली रहती है क्यों ना हम आ कर इसके घर को ही  साफ कर दें, माना की सामान पुराना है लेकिन कुछ तो पैसा मिलेगा और यह बुढ़िया अकेली हमारा कुछ बिगाड़ भी नहीं पाएगी। ”

चोरों ने बुढ़िया के घर को अच्छी तरह से देख लिया और समझ लिया कि उन्हें किस तरह से बुढ़िया के घर की सफाई करनी है।

उसके बाद चोर अपने घर वापस चले गए बुढ़िया बेचारी को सपने में भी यह ख्याल नहीं आया कि उसके घर में भी कभी चोरी हो सकती है। क्योंकि उसके घर में तो खुद के उसके कपड़े तक उसके नहीं थे सब कुछ गांव वाले उसे दिया करते थे।

जो वह अपने घर में रख लेती थी खैर कुछ दिन बीत गए और 1 दिन रात में चोर अपने दो साथियों को लेकर बुढ़िया के घर पहुंच गए कमाल की बात यह थी, कि उस दिन सरपंच ने बुढ़िया को चावल दूध और चीनी दी थी ,और बुढ़िया बहुत खुश थी बुढ़िया ने ख़ुशी ख़ुशी अपने लिए खीर बनाई और खीर बनाकर वह उस खीर को चूल्हे पर रखकर, सोचने लगी कि अभी तो खीर बहुत ही गर्म है

जबकि थोड़ी ठंडी हो जाएगी तब आराम से खाऊंगी और अपने बिस्तर पर लेट गई और खीर के ठंडा होने का इंतजार करने लगी लेटे-लेटे उसे नींद आ गई और वे सो गई,और जोर-जोर से खर्राटे लेने लगी।

चोर बाहर खड़े थे बुढ़िया के खर्राटे की आवाज सुनते ही उन्होंने सोचा कि चलो अब रास्ता साफ हो गया और अब हम आराम से बुढ़िया का घर साफ कर सकते हैं, वह सब जल्दी- जल्दी आ कर बुढ़िया के घर में सामान तलाशने लगे परंतु कमाल की बात यह थी कि उन्होंने जो देखा था वह बिल्कुल गलत था।

बुढ़िया का घर तो सामान से भरा हुआ था। किंतु एक भी सामान साबुत नहीं था हर सामान टूटा-फूटा पुराना और खराब था। यह चोर बड़े दुखी हुए और बुढ़िया को बहुत गालियां देने लगे वह बोले:-

” देखो कितनी दुष्ट बुढ़िया है आराम से सो रही है और हम बेचारे  इतनी मेहनत कर रहे हैं। ”

तभी दूसरे चोर की नजर चूल्हे पर रखी खीर पड़ी, गरम-गरम खीर को देखकर चोर ने कहा, चलो बुढ़िया के घर कुछ और नहीं मिला तो कम से कम खीर तो है और वह उसको खाने लगे जब वह खीर खाकर जाने लगे। तो उन्होंने थोड़ी सी खीर बुढ़िया के लिए छोड़ दी किंतु जब उन्होंने बुढ़िया की तरफ देखा तो उसका हाथ खुला हुआ था।  जैसे वह कुछ मांग रही हो साथ ही उसका मुँह भी खुला हुआ था।

जिसे देख कर चोरों ने सोचा की बिचारी बुढ़िया लोगों से मांग मांग कर अपना जीवन बिता रही है, लगता है, बहुत थक गई है, और खाने के लिए खीर मांग रही है, आखिर उम्र में है तो हमारी मां के ही बराबर और  बिना कुछ सोचे समझे गरम-गरम खीर बुढ़िया के मुंह में डाल दी, गरम-गरम खीर मुंह में पढ़ते ही बुढ़िया जोर से चिल्लाई:-

” हाय दइया ! मार डाला, मार डाला मार डाला”

बुढ़िया की चीख सुनते ही चोर डर के जल्दी-जल्दी छुपने लगे, जिसने मुंह में खीर डाली थी वह  ऊपर जाकर छिप गया एक चारपाई के नीचे और एक चारपाई के दाएं, बुढ़िया की चीख सुनते ही गांव वाले बुढ़िया के घर आ गए और पूछने लगे, क्या हुआ मां?

” बुढ़िया बोली मुझे क्या पता ऊपर वाला जाने यह सुनते ही ऊपर छिपा हुआ चोर बोला, अरे भला मैं क्यों जानू तुम्हारी चारपाई के नीचे छिपा चोर ना जाने, यह सुनते ही चारपाई के नीचे वाला चोर बोला मैं ही क्यों जानू चारपाई के दाए छुपा चोर क्यों ना जाने ?”

और इस तरह से तीनों चोरों ने खुद ही अपना पता गांव वालों को बता दिया और फिर गांव वालों ने उन्हें पकड़ कर खूब पिटाई करी और वापस भेज दिया उसके बाद से चोरों ने कान पकड़ लिया कि आज के बाद कभी वह चोरी कभी नहीं करेंगे।

Moral of the story in hindi :-

चोर चाहे जितनी भी कोशिश करे अपने आप को छुपाने की, लेकिन वह फिर भी पकड़ा जाता है। इसलिए हमें कभी चोरी नहीं करनी चाहिए और अपने बच्चों को येही सीख देनी चाहिए।


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by Shubhi Gupta ( शुभी गुप्ता )
Story and Poem Writer

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