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Kaal Sarp Dosh – जानिए कालसर्प दोष क्या होता है? इसके लक्षण एवं निवारण के उपाय

kaal sarp dosh

 

दोस्तों, कुंडली में कालसर्प दोष (kaal sarp dosh ) को ज्योतिष के अनुसार बहुत ही नुकसान पहुचने वाला दोष बताया गया है। बहुत से लोगों को पता ही नहीं होगा, काल सर्प दोष क्या है? और काल सर्प दोष क्यों होता है? लेकिन अगर किसी को उसकी कुंडली में कालसर्प दोष बताया जाता है उस इंसान के मन में काफी भय भर जाता हैं, आज के इस लेख में हम कालसर्प दोष कितने प्रकार के होते हैं?, काल सर्प दोष का उपाय, काल सर्प दोष पूजा के बारे में जाने गए।  

 

भारत एक ऐसा देश है जो अपने शास्त्रो तथा वेदों के लिए जाना जाता है। यहां के लोगों को शास्त्रों, वेदों, कुंडली, ज्योतिष शास्त्र, भाग्य आदि में अटूट विश्वास है। भारतीय व्यक्ति शिशु के जन्म के समय उसकी कुंडली बनवा लेते हैं, जिससे कि शिशु के भविष्य में आने वाली सभी समस्याओं का पता लगाया जा सके और उनका उपाय किया जा सके। कुंडली के माध्यम से कई योग का पता चलता है जिसमें से कुछ शुभ योग होते हैं कुछ अशुभ योग होते हैं। अशुभ पता चलने पर उनके उपाय किए जाते हैं शास्त्र के अनुसार कुंडली में अनेक अशुभ योग होते हैं। उनमें से ही एक है कालसर्प योग दोष।

कालसर्प योग होता क्या है? आइए हम इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं। 

 

 

काल सर्प दोष क्या है?

कालसर्प योग भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मानव के जन्मांग चक्र में जब राहु और केतु आमने सामने आ जाए अर्थात दोनों गए 180 डिग्री पर आ जाए और बाकी के सभी ग्रह राहु और केतु की किसी एक तरफ आ जाए और दूसरी तरफ कोई ग्रह ना बचे तो ऐसी स्थिति को कालसर्प योग कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि कालसर्प योग हमारे पिछले जन्म के पाप से संबंधित होते हैं जो इस जन्म में कालसर्प योग बन कर सामने आते हैं । 

 


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कालसर्प दोष कितने प्रकार के होते हैं?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कालसर्प योग 12 प्रकार के होते हैं। जो अलग-अलग फल देते हैं आज हम आपको उनके प्रकार के बारे में बताने जा रहे हैं तथा वे क्या फल देते हैं या उन से क्या नुकसान होता है उसके बारे में भी हम आपको बताएंगे। 

 

1. अनंत कालसर्प दोष:- जब कुंडली में पहले घर में राहु और सातवें घर में केतु हो तथा बाकी 7 ग्रह इन दोनों ग्रहों के बीच आ जाए तब ऐसी स्थिति को ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अनंत कालसर्प योग के नाम से जाना जाता है।

अनंत कालसर्प योग से क्या समस्याएं आती हैं। इसकी मुख्य समस्याएं हैं प्रेम विवाह में दिक्कत होना, विवाह में विलंब होना, स्वयं तथा परिवार में बीमारियों का होना, पीड़ित व्यक्ति का मानसिक रूप से सामना होना आदि। 

2. कुलिक कालसर्प योग:- कुलिक कालसर्प योग उसे कहते हैं जब दूसरे घर में राहु हो और आठवें घर में केतु हो ऐसी स्थिति को कुलिक कालसर्प योग के नाम से जाना जाता है। 

कालसर्प योग से अनेक समस्याएं व्यक्ति को झेलने पड़ते हैं। जैसे कि शरीर के किसी भाग में चोट लग जाना। पारिवारिक जीवन में क्लेश होना, पति-पत्नी के संबंधों में तनाव आना, तलाक जैसी स्थिति बन जाना।

3. वासुकि कालसर्प योग:- ऐसी स्थिति होती है जब तीसरे घर में राहु 9 घर में केतु हो और बाकी के सभी ग्रह इन दोनों ग्रहों के बीच में आ जाए। यह स्थिति वासुकि कालसर्प दोष के नाम से जाने जाते हैं। 

इस से अनेक समस्याएं आते हैं जैसे कि पितृदोष स्वयं पर भी हो सकता है और परिवार पर भी हो सकता है।

4. शंखपाल कालसर्प योग:- इस योग में राहु चौथे घर में तथा केतु दसवें घर में आ जाता है और अन्य सभी ग्रह इन दोनों ग्रहों के बीच में आ जाते हैं। 

ऐसी स्थिति में व्यक्ति जिन समस्याओं का सामना करता है वह है असफलता, व्यक्ति का चोरी करना, पारिवारिक झगड़ा होना आदि।

5. पद्म कालसर्प योग:- पद्म कालसर्प योग में पांचवी घर में राहु तथा 11वीं घर में केतु विराजमान हो जाते हैं और अन्य सातों ग्रह इन दोनों ग्रहों के मध्य विराजमान रहते हैं। ऐसी स्थिति को पदम कालसर्प योग के नाम से जाना जाता है। 

इसमें जो समस्याएं उत्पन्न होती है वह संतान हीनता जैसी समस्या।

6. महापद्म कालसर्प योग:- महापदम कालसर्प योग में छठे घर में  राहु और 12 घर में केतु विराजमान हो जाते हैं और अन्य सभी ग्रह इन दोनों ग्रहों के मध्य विराजमान रहती हैं।

महापदम कालसर्प योग में व्यक्ति को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे पति-पत्नी के बीच खटपट, पारिवारिक जीवन सुखी नहीं रहना आदि।

7. तक्षक कालसर्प योग:- इस योग में सातवें घर में राहु और पहले घर में केतु विराजमान हो जाते हैं।

परिवार वालों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसै शारीरिक विकलांगता, स्वास्थ्य सही नहीं रहना, घर में बीमारियों का होना मानसिक विकलांगता आदि।

8. कर्कोटक कालसर्प योग:- इस में राहु आठवें घर में और केतु दूसरे घर में विराजमान हो जाता है। 

इस योग में परिवार को अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे कि परिवार में बीमारी होना, पीड़ित व्यक्ति को परिवार का प्यार नहीं मिलना आदि। 

9. शंखचूड़ कालसर्प दोष:- कुंडली में राहु अगर नवें घर में और केतु तीसरे स्थान में हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग शंखचूड़ कालसर्प दोष कहलाता है। 

इस दोष के अनुसार व्यक्ति को अनेक समस्याओं का सामना करना पढ़ता है उसके जीवन में कई उतार चढ़ाव आते है यह दोष पिता, भाई, संतान के मध्य दूरियां उत्पन्न कर सकता है। और ऐसे में पितृ दोष का संयोग बना रहता है।

10. घातक कालसर्प योग:- इस स्थिति में दसवें घर में राहु और चौथे घर में केतु विराजमान रहते हैं तथा अन्य सभी ग्रह इन दोनों ग्रहों के मध्य विराजमान हो जाते हैं। 

इस दोष में जो समस्याएं पीड़ित व्यक्ति के सामने आती है वह भयंकर मुसीबत आ सकती है परिवार वालों पर, मां की मृत्यु हो सकती है, बच्चे को सौतेली मां का प्यार मिल सकता है आदि।

11. विषधर कालसर्प योग:- इस योग में 11वीं घर में राहु तथा पांचवी घर में केतु विराजमान हो जाते हैं और अन्य सभी ग्रह इन दोनों ग्रहों के मध्य विराजमान रहते हैं ।

इस योग में जो समस्याएं व्यक्ति को परेशान करते हैं वह है व्यक्ति का गैरकानूनी कार्यो में लिप्त हो जाना, अपराधिक गतिविधियां शुरू कर देना आदि।

 12. शेषनाग कालसर्प योग:- इस ग्रह के अनुसार राहु 12 घर में और केतु छठे घर में आ जाते हैं तब शेषनाग कालसर्प योग की स्थिति बनती है।

इसके अनुसार जो समस्याएं व्यक्ति के सामने आते हैं वह आत्महत्या जैसी समस्या, जीवन में परेशानियों का होना आदि।

 

कालसर्प योग कब तक रहता है ?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कालसर्प योग पीड़ित व्यक्ति को लंबे समय के लिए परेशान करता है। व्यक्तियों के पास आर्थिक सुविधाएं हैं वह विभिन्न प्रकार के उपाय कर के कालसर्प योग से मुक्ति पा लेते हैं परंतु जिन व्यक्तियों को इसकी जानकारी नहीं है तथा आर्थिक रूप से संपन्न नहीं है इस कालसर्प योग से लंबे समय तक पीड़ित रहते हैं। कई स्थितियों में ऐसा देखा गया है कि व्यक्ति जीवन भर कालसर्प योग से पीड़ित रहता है। कई व्यक्तियों को 42 वर्ष तक और कई व्यक्तियों को 49 वर्ष तक कालसर्प योग परेशान करता है।

  

कालसर्प योग के लक्षण:-

हम अपने दैनिक जीवन में यह कैसे पता लगा सकते हैं कि कालसर्प योग हमें पीड़ित कर रहा है। आइए हम आपको इसके बारे में कुछ लक्षण बताने जा रहे हैं जो कि इस प्रकार हैं :-

1. यदि व्यक्ति कालसर्प योग दोष से पीड़ित हैं तो उसे स्वप्न में सर्प दिखाई देने लगते हैं।
2. कालसर्प दोष से पीड़ित होने पर व्यक्ति कितनी भी मेहनत करें परंतु उसे सफलता नहीं मिलती।
3. व्यक्ति को सदैव मानसिक तनाव बना रहता है।
4. पीड़ित व्यक्ति के घर में क्लेश पूर्ण वातावरण रहता है एवं उसका पारिवारिक जीवन भी क्लेश पूर्ण हो जाता है।
5. व्यक्ति के अचानक से पुराने तथा गुप्त शत्रु बनना शुरू हो जाते हैं।
6. सर्प दोष होने पर व्यक्ति से संतान सुख प्राप्त नहीं कर पाता।
7. कालसर्प दोष होने पर व्यक्ति के विवाह में विलंब होने लगता है।
8. पीड़ित व्यक्ति स्वयं तथा उसके परिवार में कोई व्यक्ति लंबी बीमारी से ग्रसित हो जाता है।
9. पीड़ित व्यक्ति दुर्घटनाग्रस्त हो सकता है या व्यक्ति के घर में कोई व्यक्ति दुर्घटनाग्रस्त हो सकता है।10. पीड़ित व्यक्ति को रोजगार में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
11. पीड़ित व्यक्ति द्वारा किए जाने वाले मांगलिक कार्य में बाधा आने लगती है।
12. पीड़ित व्यक्ति को गर्भपात जैसी समस्या, अकाल मृत्यु जैसी समस्या या प्रेत बाधा आदि जैसे समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

 


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 कालसर्प दोष से बचने के कुछ उपाय इस प्रकार हैं:-

1. सावन मास के महीने मे आप शिवजी का रुद्राभिषेक करें। रुद्राभिषेक में आप जल, दूध, बेलपत्र आदि चढ़ा सकते है।
2. सोमवार के दिन तांडव स्त्रोत पाठ करें।
3. अपने पूजा घर में श्री कृष्ण की मोर पंख वाली मूर्ति रखें।
4. बहते जल में चांदी के नाग नागिन का प्रवाह करें
5. राहु शांति उपाय तथा केतु शांति उपाय करें
6. राहु की पूजा शिव मंदिर में राहु काल में करें
7. प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करें तथा दुर्गा पाठ भी कर सकते हैं
8. कालसर्प दोष से बचने के लिए आप भैरव उपासना करें
9. महामृत्युंजय मंत्र तथा शांति उपाय करें
10. नाग पंचमी के दिन किसी नाग को वन में छोड़ दें
11. बड़ों का आशीर्वाद लें

 

ऐसे करें अपने घर पर ही कालसर्प दोष की पूजा:-

1. कालसर्प दोष से पीड़ित जातक प्रत्येक सोमवार को ब्राह्म मुहूर्त में 4 बजे साधे जल में गंगाजल मिलाकर स्नान कर धुले हुए सफेद रंग के कपड़े पहने।

2. पवित्र होकर घर में अगर शिवलिंग हो तो या नहीं हैं तो मिट्टी की छोटी सी शिवलिंग बनाकर, इस मंत्र से स्थापना, आवाहन करें।

3. शिवलिंग स्थापना मंत्र। 

ऊँ मनो जूतिर्जुषतामाज्यस्य, बृहस्पतिर्यज्ञमिमं तनोत्वरिष्टं, यज्ञ ग्वं समिमं दधातु। विश्वे दासइह मादयन्तामो3म्प्रतिष्ठ। ऊँ भूर्भुवः भगवते शाम्भ सदाशिवाय आवाहयामि स्थापयामि। ततो नमस्कारं करोमि।

4. अब शिवलिंग पर 11 साबुत चावल के दाने श्री रामनाम का उच्चारण करते हुए अर्पित करें।

5. चावल अर्पित करते समय मन ही मन अपनी विशेष इच्छा, कामना का स्मरण करें।

6. ऐसा लगातार 11 सोमवार तक करने से अवश्य ही कालसर्प दोष से मुक्ति मिलेगी। ध्यान रखे कि पूजा का समय एक ही होना चाहिए, बार बार समय नहीं बदलना हैं ।

7. 11 सोमवार तक एक ही समय एक ही स्थान पर किसी प्राचीन शिवलिंग के ऊपर एक मुट्ठी साबुत गेंहू, एक गीला नारियल व एक सिक्का ये सब सामग्री “श्री रामनाम मंत्र का उच्चारण करते हुए अर्पण करें।

8. जो सिक्का प्रथम सोमवार को लिया है वही संख्या वाला सिक्का हर बार लेना है, अगर पहले सोमवार को 1 रूपये का सिक्का लिया था तो हर सोमवार को भी 1 रूपये का ही लेना हैं, 2 या 5 का नहीं लेना।

9. शिवलिंग पर सबसे पहले गेंहू को अर्पण करें, फिर नारियल एवं उस पर सिक्का रखकर अर्पण करें। इस पूरी क्रिया के दौरान श्री राम नाम का जप निरंतर करते रहें। यह 11 सोमवार तक करें।

 

kaal sarp dosh ke upay करने से आप kaal sarp yog को कम कर सकते है बहुत से लोग ऐसे ग्रह- दोषों को नहीं मानते, लेकिन हर किसी को उसकी कुंडली के हिसाब से कोई ना कोई ग्रह जरूर होता है। अगर हम यह छोटे-मोटे उपाय करते रहें, तो काफी हद तक इन ग्रहों के बुरे प्रभाव से बचा जा सकता है। 

By:- Neha sudhir bajpai

Image credit:- canva

Author (लेखक)

  • Lifewingz Team

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