jadui kahaniya – राजा की मुछों का जादू। Moral story in hindi 2021

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दोस्तों, आज की कहानी ( magical story in hindi ) जादू की कहानियों में से ही एक रोचक कहानी है

 

एक समय की बात है हिमालय की तलहटी में एक राज्य था जिसका नाम था बहुला पुर, बहुला पुर अपने राजा की बड़ी-बड़ी मूछों के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध था, और राजा को भी अपनी मूंछो से बहुत प्यार था।

वह अपनी मूछों को अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करता था। अपनी मूंछों के बारे में वह बड़े ही संवेदनशील थे, उनकी मूछे उनकी लंबाई से भी बड़ी थी, इतनी बड़ी कि उनकी लंबाई को संभालने के लिए राजा के दाएं बाएं दो दरबारी चला करते थे।

जो दोनों तरफ से उनकी मूछों को पकड़ कर रखते थे लोग राजा की लंबी मूछों को देखकर मूंछो को जादुई मूछे कहा करते थे, दिन रात महाराज भी अपनी मूछों को बढ़ाने के लिए तरह-तरह के यत्न किया करता था।

इसके अलावा राजा की दूसरी खूबी थी उनका न्याय,वह अपने न्याय के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध थे। न्याय के मामले में बहुत से लोगों उसे क्रूर भी कहा करते थे। विवाह के बहुत वर्ष पश्चात भी राजा के यहां किसी संतान का जन्म नहीं हुआ था।

एक बार अपने विवाह के 15 सालों के बाद जब राजा अपने दरबार में बैठा हुआ अपनी प्रजा के लोगों के साथ न्याय कर रहा था। तो अचानक एक दासी ने आकर सूचना दी:-

“महाराज बधाई हो बधाई हो, महारानी गर्भवती हैं और 9 महीने के बाद राजा को अपना वारिस मिलने वाला है”

चारों तरफ खुशी की लहर दौड़ गई और राजा भी यह सुनकर बड़े प्रसन्न हुए। सारी प्रजा भी समय पूरा होने का इंतजार करने लगी ताकि उनके राज्य को वारिस मिल जाए और समय के साथ महारानी ने एक बड़े ही प्यारे से बेटे को जन्म दिया।


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राजकुमार बड़ा ही सुंदर था और सब के साथ हिल मिलकर रहता था, उसने कभी किसी को किसी प्रकार से भी तंग नहीं करा, वह जहां खेलता वहां से हर समय हसने, खिल- खिलाने की आवाजें आती रहती थी।

राजकुमार के महल में होने से जैसे राज महल में जीवन आ गया था। महाराजा और महारानी भी अपना ज्यादातर समय राजकुमार के साथ खेलने में बिताया करते थे। राजकुमार 3 साल का हो गया था और वह बड़ा ही विद्वान था।

उसे उसके गुरुजी जो बताते वह बड़ी सरलता से सीख लेता था, और जब वे उसे अपनी तोतली भाषा में राज दरबार में उसने क्या सीखा बताता तो सारी प्रजा मोहित हो जाती थी। अचानक एक दिन राजकुमार रोने लगा, वह किसी के भी चुप कराने से चुप नहीं हो रहा था।

खाने के समय खाना खाता और फिर रोने लगता, नहाने के समय नहाता फिर रोने लगता, सोता लेकिन उठते ही फिर रोने लगता, सारा राज महल प्रजा महाराज सभी बहुत परेशान हो गए थे।

किसी को समझ में नहीं आ रहा था कि राजकुमार को चुप कैसे कराया जाए सब ने तरह-तरह के करतब दिखाए। राजकुमार के लिए नए-नए खिलौने लाए गए, दरबार के विदूषक को बुलाया गया जब तक वह सब अपनी कला और करतब दिखाते तब तक तो वह चुप रहता।

लेकिन जैसे ही वह अपनी विद्याओं को समाप्त करके वापस जाते, राजकुमार फिर से रोने लगता, राजकुमार के लगातार रोने के कारण महाराज भी बहुत परेशान और क्रोधित हो गए थे और आखिर उन्होंने एक दिन दरबार में आकर कहा:-

“बस बहुत हो गया अब हम इससे ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर सकते राजकुमार की वजह से राजकाज के काम में काफी रुकावट आ रही हैं और समय बहुत बर्बाद हो रहा है।”

“जिसके कारण राज्य के विकास के बारे में सोच नहीं पा रहे हैं इस तरह से राजकुमार को राज्य का विद्रोही समझा जाएगा और हम उसे कल दरबार में बुलाकर सजा देंगे”

सारा राज्य दरबारी और महारानी सब जानते थे कि राजा, अपनी मूछों के अलावा अगर किसी से प्यार करते हैं तो वह है न्याय अब राजकुमार को किसी तरह से बचाया नहीं जा सकता है। दरबारियों ने महाराज को समझाने की बहुत कोशिश करी और उन्होंने बोला:-

“महाराज है वह आपका बेटा है और अभी बहुत छोटा है उसे राजकाज की कोई समझ नहीं इसलिए वह सजा का अधिकारी नहीं है”

किंतु महाराज किसी तरह से राजी नहीं हुए अगले दिन महारानी छोटे से राजकुमार को लेकर राज दरबार में आई और बोली:-

“लीजिए महाराज आपके राज्य का विद्रोही आपके सामने प्रस्तुत है इसने बहुत बड़ा पाप किया है वह पाप यह है कि यह रोता है, इसके इस बात के लिए आप इसे कड़ी से कड़ी सजा सुनाइए”

ऐसा बोलकर महारानी रोने लगी महारानी के शब्दों से महाराज का ह्रदय द्रवित हो गया और वह राजकुमार की तरफ देखने लगे। यहां तक कि सारे दरबारियों की आंखों में भी पानी आ गया और वह महाराज से दया की भीख मांगने लगे।

जब महाराज राजकुमार की तरफ देख रहे थे तो राजकुमार ने रोते-रोते अपने दोनों हाथ महाराज की तरफ आगे बढ़ा दिए, दरबारियों ने कहा महाराज अब आप भी इसे गोद लीजिए।

आखिरकार महाराज पिता थे वे सिंहासन से नीचे आए और उन्होंने राजकुमार को गोद ले लिया, राजकुमार ने पिता की गोद में आने के बाद 2 मिनट तक अपने पिता का मुंह देखा और जब उसने अपने पिता की मूछों को बोलते समय के झुकते देखा तो उसे बड़ा ही मजा आया।

उसके बाद बिना देर करें वह उनकी मूछों को पकड़कर वे जोर-जोर से हंसने लगा, सभी लोग आश्चर्यचकित हो गए बहुत दिनों के बाद राजकुमार की हंसी इस तरह सुनाई दे रही थी, और उसे हंसता देख कर महाराज स्वयं भी हंसने लगे और महाराज को हंसता देखकर सारी प्रजा महारानी और दरबारी भी हंसने लगे।

राजकुमार को हंसते देखकर दरबारियों ने हंसते हुए बोला महाराज हम इस विद्रोही के पिता को सजा देंगे क्योंकि यह विद्रोही अभी बहुत ही छोटा है।

इसलिए इसके अपराध की सजा इसके पिता को मिलेगी जब भी यह विद्रोही रोकर राजकाज के काम में रुकावट डालने की कोशिश करेगा, इसके पिता को अपनी मूंछो से इसका दिल बहलाना होगा।

पहली बार महाराज अपनी मूंछों के कारण किसी और की खुशी का कारण बने थे और वो राजा जो अपनी मूछों को किसी को छूने नहीं देते थे। उनका बेटा उन्हीं मूछों को खींच-खींच कर जोर-जोर से हंस रहा था।

जिस रोते हुए राजकुमार को चुप करवाने और हसाने के लिए कोई भी तरकीब काम ना आई। जिसे कोई भी चुप नही करवा पाया उसे राजा की मुछों ने चुप करवा दिया। और उसी समय से राजा की मुछों को जादुई मुछों का नाम दे दिया।

इसके बाद जब भी राजकुमार उदास होता महाराज उसे गोद ले लेते और वे उनकी मूंछों से खूब खेलता इसके बाद राजकुमार कभी उदास नहीं हुआ और महाराज की जादुई मूछों के साथ वह बड़ी खुशी से अपना बचपन बिताता रहा।

 

Moral of Story :- कभी-कभी हमारी समस्याओं का मारे आस-पास ही होता है लेकिन हम उसे पहचान नही पाते है

 

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by Shubhi Gupta ( शुभी गुप्ता )
Story and Poem Writer

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image credits:- freepik.com

 

 

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