महामूर्ख दोस्तों का जादू – hindi mein kahani – bhoot ki kahaniya

moral stories for kids in hindi

दोस्तों, ये एक jadu ki kahani ( bhoot pret ki kahani ) एक रोचक कहानी है जो दादी की कहानियों ( Ghost real story in hindi ) में से एक है

 

एक गांव में 4 दोस्त रहते थे। राजेश, रितेश, संजय और सोनू यह चारों ही गांव के सबसे मूर्ख लड़के थे सारा दिन इधर-उधर घूमते, कभी किसी के खेत से कुछ तोड़ कर खा लिया, कभी किसी को परेशान कर लिया। गांव के सभी लोग और इन चारों के घर वाले इनसे बहुत परेशान हो गए थे।

 

आप इस bhoot ki kahani को सुन भी सकते हैं:

एक दिन संजय के पिता ने राजेश, रितेश और सोनू के पिता को अपने घर बुलाया और कहां,”अपने लड़कों को सुधारने का अब हमारे पास कोई तरीका नहीं बचा है।

 

हमने उन्हें समझाने और सही राह दिखाने की बहुत कोशिश की लेकिन ना तो वो चारों कुछ काम करते हैं और ना ही अपनी बेवकूफियां करना छोड़ते हैं।

 

इसलिए मैं यह सोचता हूं कि मेरा एक मित्र शहर में बहुत बड़ा जादूगर है क्यों नहीं इन चारों को उसके पास भेज दे और उससे इनको जादू सिखाने के लिए बोले।

 

” संजय के पिता की यह बात सुनकर बाकी के तीनों बच्चों के पिता मान जाते हैं और कहते हैं,” जहां इतना कुछ करके देखा वहां यह भी कर के देख लेते हैं।”

 

फिर संजय के पिता अपने मित्र जादूगर से बात करते हैं और चारों लड़कों को एक साथ बुलाते हैं और उनसे कहते हैं, शहर में मेरा एक मित्र बहुत ही बड़ा जादूगर है।

 

मैं तुम चारों को उसके पास भेज रहा हूं ताकि तुम उससे जादू सीख सको और आगे अपने परिवार की देखभाल कर सको।

 

लेकिन तुम लोगों को वँहा पर 2 साल तक रहकर जादू सीखना होगा और पूरी मेहनत करनी होगी। यह सुनकर संजय, सोनू और राजेश बड़े खुश होते हैं तभी रितेश बोलता है।

 

“अरे वाह जादू, जादू तो हमें बहुत पसंद है कितना मजा आएगा अब जब भी हमें जादू देखना होगा तो हमें उसके लिए कोई पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं होगी अब हम फ्री में जादू देखा करेंगे।”

 

यह सुनकर संजय के पिता अपना सर पकड़ लेते हैं और मन ही मन सोचते हैं कि मैं इन बेवकूफ़ हो शहर भेज तो रहा हूं ना जाने यह क्या करेंगे।

 

दूसरे दिन सुबह उन चारों को शहर की गाड़ी में बैठा दिया जाता है और वह चारों जादू सीखने पहुंच जाते हैं। 2 सालों तक वह चारों बड़ी मेहनत करते हैं और जादूगर के अनुसार अध्ययन और तपस्या भी करते हैं।

 

2 साल के बाद जब वह पूरी तरह से जादू सीख लेते हैं तो अपने गांव वापस आने के लिए निकल पड़ते हैं। गांव के पास के रेलवे स्टेशन और उनके गांव के बीच एक जंगल पड़ता है वह स्टेशन पर उतरते हैं और जंगल के रास्ते अपने गांव की तरफ चल देते हैं।

 

चलते चलते अचानक संजय बोलता है,” रुको मुझे कुछ दिखाई दिया है।” संजय की बात सुनकर वह तीनों वहीं रुक जाते हैं और संजय दूसरी दिशा में चल देता है, वहां जाने के बाद संजय अपने तीनों दोस्तों को वहां बुलाता है। वह तीनों वहां जाकर देखते हैं तो उन्हें एक हड्डियों का ढांचा दिखता है।

 

यह देखकर सोनू बोलता है ,”तू ने यह देख कर हमें रुकने को बोला है। अब तू इन हड्डियों का क्या करेगा?” सोनू की बात सुनकर संजय बोलता है,”आज हम यह पता लगा सकते हैं कि हम चारों में से सबसे बड़ा जादूगर कौन है?”

 

संजय मंत्र पढ़ने लगता है:-

“ॐ क्लीम हड्डी हड्डी डिंग,

ॐ क्लीम हड्डी हड्डी डिंग,

ॐ क्लीम हड्डी हड्डी डिंग”

 

मंत्र खत्म होते ही हड्डियों का ढांचा एक दूसरे से जुड़ कर एक शेर के आकार में खड़ा हो जाता है। यह देख कर सोनू बोलता है,”बस तुझे इतना ही जादू आता है,देख अब मैं क्या करता हूं|”

 

सोनू मंत्र पढ़ना शुरू करता है:-

” ॐ क्लीम अकारम आरंभ फट्ट

ॐ क्लीम अकारम आरंभ फट्ट

ॐ क्लीम अकारम आरंभ फट्ट”

 

मंत्र खत्म होते ही उस शेर की हड्डी के ढांचे के ऊपर मांस से एक आकार आ जाता है। यह देख कर राजेश बोलता है,”तुम दोनों को सिर्फ इतना ही आता है अब मैं दिखाता हूं कि,”मैं तुमसे भी बड़ा जादूगर हूं।

 

राजेश मंत्र पढ़ना शुरू करता है:-

” ॐ चर्म गर्म भट्ट स्वाहा

ॐ चर्म गर्म भट्ट स्वाहा

ॐ चर्म गर्म भट्ट स्वाहा”

 

राजेश का मंत्र खत्म होते होते उस शेर के मांस के ऊपर शेर की खाल और उसके बाल आ जाते हैं। अब शेर पूरी तरीके से आकार ले चुका होता है। तभी रितेश बोलता है,”तुम सब ने तो कुछ नहीं सीखा मैं तुम सबसे बड़ा जादूगर हूं अब मैं तुम्हें अपना जादू दिखाता हूं यह बोलकर रितेश मंत्र बोलना शुरू करता है:-

 

“ॐ क्लीम ग्लीम स्लीम फट स्वाहा

ॐ क्लीम ग्लीम स्लीम फट स्वाहा

ॐ क्लीम ग्लीम स्लीम फट स्वाहा”

 

रितेश का मंत्र खत्म होते ही उस शेर में जान आ जाती है और वह शेर रितेश के ऊपर कूदता है और उसे मार देता है। यह देख कर बाकी के तीनों दोस्त डर जाते हैं।

 

फिर शेर राकेश के ऊपर झपटता है और उसे भी मार देता है। इस तरह बारी- बारी शेर संजय और सोनू को भी मार देता है और बड़े आराम से खुशी-खुशी टहलता हुआ जंगल में चला जाता है।

 

Bhoot ki kahani se shiksha :-

“सही समझ के बिना ज्ञान व्यर्थ है”

 

दोस्तों, जब तक हम में किसी भी कार्य को करने की सही समझ नही होगी, तब तक ऐसा ज्ञान हमारे लिए व्यर्थ है। जिस तरह इस कहानी में चारों लड़कों में ज्ञान तो था, लेकिन समझ बिल्कुल नही थी और उसी कारण चारों को अपनी जान भी घवाने पड़ी।

 


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by Shubhi Gupta ( शुभी गुप्ता )
Story and Poem Writer

 

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