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जादुई कहानी – Jadui ki Kahani in Hindi – jadui kahaniya 2023

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दोस्तों, ये एक jadu ki kahaniya में से ही एक रोचक कहानी है जो ( kahani in hindi me ) dadimaa ki kahaniya में से एक है।

यह एक रोचक कहानी है, जो dadimaa की jadui kahaniya में से एक है। एक समय की बात है, भारत के एक गांव में एक बहुत ही लालची आदमी रहता था। जिसका नाम था, कलंदर, वह उस गांव के राजा के लिए टैक्स जमा करने का काम करता था, और उसी गांव में ही रहता था, उसका काम राजा के लिए टैक्स जमा करना था।

कहानी की ऑडियो सुने:

कलंदर जो चीज को चाहता, उसे पाने के लिए लोगों से टैक्स लेने के नियमों को बदल देता और टैक्स के नाम पर उनसे जो चाहता वह हासिल कर लेता।

जैसे उनकी बकरियां, बैल फसल आदि। धीरे-धीरे कलंदर की लालच की आदत की बात पूरी जगह फैल गई, कलंदर के कारण सब लोग वहां पर रहने से डरते थे।

उसके पड़ोसी गांव में राघव नाम का किसान रहता था, राघव का एक बेटा था विशाल जो बहुत ही चालाक और बुद्धिमान था। राघव का परिवार बड़ी गरीबी में जी रहा था।

लेकिन राघव का सपना था कि उसका बेटा एक बहुत बड़ा आदमी बने, एक बार जब सब लोग बैठ कर इधर-उधर की बातें कर रहे थे।

तो विशाल ने लालची कलंदर के बारे में सुना और विशाल ने निश्चय कर लिया और बोला मैं किसी ना किसी तरह से इस लालची कलंदर को राजा से सजा जरूर दिलवाउंगा।

राजा को कलंदर के इस लालची स्वभाव के बारे में पता नहीं है इसीलिए ये मुँह माँगे क्र वसूल कर के सबको सताता है। 

कलंदर एक बड़ा ही शातिर और चालाक आदमी था। इसलिए विशाल ने बहुत सोच समझकर एक योजना बनाई अपने परिवार के सो के उठने से भी पहले वह अपने पिता के बगीचे में गया और वहां लगे एक छोटे से आम के पेड़ को खोज के निकाल लिया।

विशाल पेड़ को लेकर जल्दी-जल्दी कलंदर के गांव की तरफ से निकल पड़ा, उसे किसी भी तरह सुबह के समय ही अपनी योजना के अनुसार कलंदर के सामने पहुंचना था।

वो भी तब जब वह लोगों से टैक्स वसूल कर रहा हो, ठीक समय पर विशाल कलंदर के सामने पहुंच गया उस समय कलंदर लोगों से टैक्स वसूल कर रहा था।

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 विशाल अपना परिचय देता हुआ बोला:- 

“सरकार मैं विशाल हूँ, अभी आया हूं और मुझे यह पता नहीं है कि इस गांव में एक गरीब आदमी कितना टैक्स देता है, क्योंकि मैं एक बहुत ही गरीब आदमी हूं और मेरे पास देने के लिए कुछ भी पैसे नहीं है”

उसकी बात सुनकर लालची कलंदर बोला कुछ ना कुछ तो तुम्हें देना ही होगा तुम्हारे पास क्या है?

विशाल ने अपने पेड़ की तरफ देख कर कहा मेरे पास बस यह जादुई पेड़ है इसके सिवा कुछ भी नहीं है?

 कलंदर ने हैरान होकर कहा:-

जादुई पेड़, जादुई पेड़ का नाम सुनकर कलंदर बड़ा खुश हुआ और उसने पूछा कि आखिर इसमें क्या जादू है।

विशाल ने चालाकी से हंसते हुए कहा:-

“अरे मालिक ये बहुत ही कमाल का पेड़ है जो भी इसके पत्तों को छूता है वह कई घंटों के लिए लोगों को दिखाई नहीं देता वह पूरी तरह से लोगों के सामने से गायब हो जाता है पर वह सब को देख सकता है”

लालची कलंदर को विशाल की बात पर भरोसा नहीं हुआ उसने कहा क्या तुम मुझे ऐसा करके दिखा सकते हो?

विशाल ने कहा हां क्यों नहीं जरूर, विशाल की बात सुनकर लालची कलंदर ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा और बोला अगर तुम यहां रहना चाहते हो तो तुम्हें अपना यह पेड़ मुझे देना होगा।

मैं तुम्हें इस गांव में बिना कुछ दिए नहीं रहने दूंगा और इससे पहले कि विशाल कुछ कहता लालची कलंदर ने उसके हाथों से उसका पेड़ छीन लिया और दौड़ता हुआ अपने घर चला गया।

घर जाकर उसने पेड़ की एक पत्ती तोड़ी और उसे अपने माथे पर रख लिया, वहीं पास में उसकी पत्नी बैठकर खाना पका रही थी।

 उसने अपनी पत्नी से पूछा:- सुनो क्या तुम मुझे देख सकती हो?

पत्नी को कलंदर की बात सुनकर बहुत गुस्सा आया और वह बोली क्यों नहीं देख सकती क्या मैं तुमको अंधी नजर आती हूं?

अब कलंदर बड़ा परेशान हो गया वह भागते हुए दूसरे कमरे में गया और उसने पेड़ की दूसरी पत्नी तोड़कर फिर अपने माथे पर लगाई फिर वापस रसोई घर में आकर बोला अब क्या तुम मुझे देख सकती हो?

अब तो उसकी पत्नी को बहुत ज्यादा गुस्सा आने लगा है जोर से बोली तुम्हारा दिमाग तो ठीक है।आखिर तुम कहना क्या चाहते हो क्यों मैं तुम्हें देख पाऊंगी क्या तुम्हें लगता है कि मेरी आंखें खराब हो गई है?

लालची कलंदर बड़ा ही परेशान हुआ मैं फिर कमरे में गया उसने फिर  पेड़ की पत्ती थोड़ी फिर उसे अपने माथे पर लगाया और फिर अपनी पत्नी के पास गया फिर से दोहराया क्या तुम मुझे अब देख सकती हो?

पत्नी कलंदर के लगातार इस पागलपन से बड़ी परेशान हो गई थी।आखिर गुस्सा होकर उसने कहा नहीं मुझे तुम दिखाई नहीं पड़ रहे हो मैं तुम्हें नहीं देख सकती, लालची कलंदर तो जैसे यही सुनना चाहता था

वह खुशी से पागल हो गया, उसने सोचा कि वह गांव में जाकर इस पेड़ के जादू को परखेगा, वह चौराहे पर खड़े होकर पेड़ की पत्ती माथे पर लगाएं विचित्र- विचित्र प्रकार की हरकतें करने लगा, किंतु किसी गांव वाले ने कुछ भी नहीं कहा क्योंकि वह उससे बात नहीं करना चाहते थे।

क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं वह उनसे टैक्स ना मांगने लगे, लेकिन गांव वालों की कुछ भी ना कहने से लालची कलंदर ने समझा कि वह पेड़ सचमुच ही जादुई पेड़ है।

फिर उस दिन के बाद उसे “जो चीज पसंद आती वह उठाकर ले जाता, वह बाजार जाता किसी दुकान से बांसुरी, किसी दुकान से फल-फूल, कहीं से कपड़े”

सब उसे ऐसा करते देखते पर डर के मारे उसे कभी मना नहीं करते, लेकिन वह लालची कलंदर यह समझता कि वह किसी को दिखाई नहीं देता।

इसलिए कोई उसे कुछ नहीं कहता, एक दिन गांव को देखने के लिए राजा की शाही गाड़ी गुजरी, कलंदर ने देखा कि राजा की गाड़ी में बेश कीमती हीरे जवाहरात आदि से सजी हुई थी।

लालची कलंदर ने आदत के अनुसार पेड़ का पत्ता अपने माथे पर रखा और राजा की बग्गी से हीरे जवाहरात चुराने लगा, सरे आम उसकी यह हरकत देखकर राजा को बड़ा गुस्सा आया।

उन्होंने चिल्लाकर कहा गिरफ्तार करो इसे अब लालची कलंदर बड़ा परेशान हो गया। उसने कहा महाराज मुझे क्षमा करें इसमें मेरी गलती नहीं है।

एक गरीब आदमी ने मुझे यह जादुई पेड़ दिया जिसकी पत्तियां अपने सर पर रख कर मैं अदृश्य हो जाता था। लेकिन आज मुझे पता चला कि वह झूठ बोल रहा था क्योंकि आपने मुझे देख लिया और मैं गायब नहीं हुआ।

राजा को उसकी बात सुनकर बहुत गुस्सा आया राजा ने कहा यह तो बिल्कुल ही पागलों की तरह बात कर रहा है। क्या कोई पेड़ ऐसा भी होता है जिसकी पत्ती माथे पर रख कर कोई गायब हो जाता है।

ऐसे पागल आदमी को हम टैक्स वसूली के काम पर नहीं लगा सकते, राजा ने तुरंत ही कलंदर से उसकी नौकरी छीन ली और इसके बाद लालची कलंदर सारी जिंदगी उसी गांव में लोगों के सामने अपना मुंह छुपा कर जीता रहा।

अपने लालच के कारण उसे सारी जिंदगी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। गांव वालों को जब पता चला कि विशाल ने किस चालाकी से कलंदर को उसके अन्याय की सजा दिलाई है।

तो सभी ने उसकी बड़ी सराहना की और जब यह बात राजा तक पहुंची तो राजा ने विशाल की बुद्धिमानी देखकर विशाल को ही टैक्स वसूली की नौकरी दे दी और विशाल न्याय पूर्वक गांव में टैक्स वसूली का काम करते हुए आराम से जीवन बिताने लगा।

लालच और अन्याय के कारण कलंदर को अपनी जिंदगी लोगो के ताने  सुन कर शर्मिंदगी के साथ बितानी पड़ी।

Moral of the story in hindi :-

“लालच  बुरी बला है “

दोस्तों, हमे कभी भी लालच नही करना चाहिए। जब भी हम लालच करते है, तो अपना ही नुक्सान होता है।जिस तरह इस कहानी में कलंदर ने लालच किया और अपनी नौकरी और इज्जत दोनों ही खो बैठा।

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by Shubhi Gupta ( शुभी गुप्ता )
Story and Poem Writer

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image credits:-  freepik.com

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