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Motivational Story of Women in Hindi | भारतीय महिलाएं संघर्ष से सफलता की कहानी

महिलाओं की सफलता की कहानी

Motivational Story of Women in Hindi: दोस्तों, आज मैं आप के साथ शेयर करने जा रही हूँ Successful business woman story हिंदी में कहें तो महिलाओं की सफलता की कहानी। जिन्होंने अपने दम पर  women entrepreneurs in india में अपना नाम दर्ज किया है। यह successful business woman हम सब के लिए किसी Role model से कम नही है। तो चलिए जानते है। इन women entrepreneurs india की सफलता की कहानी। आप नारी शक्ति पर दो लाइन भी पढ़ सकते हैं।

दोस्तों, हर दौर में कई ऐसी महिलाएं हुई है जिन्होंने,अपनी मेहनत, संघर्ष और हुनर के दम पर, समाज में अपनी एक स्वतंत्र पहचान बनाई है, साथ ही अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। चाहे फिर वह भारतीय पुरुष प्रधान समाज के कड़े सामाजिक विरोध का सामना करते हुए अपने hard work और determination के बल पर देश की पहली महिला डॉक्टर आनंदी गोपाल हो या आसमान में उड़ने के सपने देखने वाली कल्पना चावला हो, इनके जैसी अनेक महिलाओं ने अपनी मेहनत और लगन को अपना हथियार बनाकर आसमान की ऊंचाइयों को छुआ है। आज कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है, जिसमें महिलाओं का वर्चस्व नहीं है।

नारी शक्ति पर शायरी – नारी शक्ति पर दो लाइन

आज हम, ऐसी ही कुछ महिलाओं के विषय में जानेंगे जिन्होंने ना सिर्फ अपनी मेहनत और हुनर से, एक Successful Woman Entrepreneur के रूप में स्वयं की पहचान बनाई है अपितु अपने साथ साथ, अन्य लोगों को भी प्रशिक्षित करके सक्षम बनाया है। 

आइए हम उन्ही में से कुछ महिलाओं के जीवन के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर संक्षेप में प्रकाश डालते हुए, उनकी सफलता के प्रेरणादाई सफर को देखते हैं। उनके नाम है:-

1. अनीता गुप्ता- भोजपुर महिला कला केंद्र (Anita Gupta- Bhojpur Mahila Kala kendra)

2. चिनू काला- रुबांस फैशन एक्सेसरीज (Chinu Kala- Rubance Fashion Accessories)

3. मनीषा भाटी-  ड्रीम हंट, इंडिया (Manisha Bhati- Dream Hunt India)

4. अजैता शाह-  फ्रंटियर मार्केट्स (Ajaita shah- Frontier Markets)

1. अनीता गुप्ता- भोजपुर महिला कला केंद्र:- (महिलाओं की सफलता की कहानी)


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अनीता गुप्ता- भोजपुर महिला कला केंद्र

8 साल की अबोध आयु में अनीता जी ने अपने ही परिवार में कुछ ऐसी घटनाएं देखी थी, जिससे उनके बाल मन पर गहरा असर पड़ा था। पुरुष प्रधान समाज में स्त्रियों के साथ होने वाले अन्याय और दुर्व्यवहार को अनीता जी ने बहुत करीब से देखा था। लिंग भेद, मजबूरी के नाम पर किसी वस्तु की तरह एक इंसान की खरीद-फरोख्त, अत्याचार, शोषण इत्यादि घटनाओं की वे स्वयं साक्षी रही थी। 

इसलिए उन्होंने बहुत छोटी सी आयु में ही तय कर लिया था कि, वे जीवन में किसी पर भी dependent नहीं रहेगी, और खुद के फैसले खुद ही लेगी। उनके पिता की असामयिक मृत्यु, मां सहित सात बच्चों का चाचाओं पर निर्भर रहना, पैसों की तंगी इत्यादि ऐसी कई घटनाएं थी जिन्होंने अनीता जी को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी।

स्कूली शिक्षा पूरी करके, distance education से कॉलेज की पढ़ाई करते हुए उन्होंने सिलाई, कढ़ाई, बुनाई जैसे कई हुनर सीखें और पारिवारिक विरोध का सामना करते हुए भी केवल मां के सहयोग से उन्होंने आसपास की लड़कियों को इसकी coaching देना भी शुरू किया। 

1993 में उन्होंने मात्र दो लड़कियों के साथ, “भोजपुर महिला कला केंद्र” की स्थापना की। पैसों की अहमियत को अच्छी तरह समझने वाली, अनीता जी का उद्देश्य स्वयं आत्मनिर्भर बनकर दुसरी लड़कियों को भी आत्मनिर्भर बनाना था। 

धीरे धीरे उनकी मेहनत रंग लाई और मात्र 2 लड़कियों को लेकर शुरू हुआ उनका केंद्र बहुत मशहूर हो गया, और भोजपुर ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी लड़कियां उनके center में आने लगी। उनकी सफलता को देखते हुए उन्हें, ग्रामीण विकास अभिकरण के तहत उनके गांव की महिलाओं को jute products बनाने की training करवाने का project दिया गया। इस project के बाद, अनीता जी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपना best देते हुए, कई सरकारी projects पर काम किया। 

जब उनके पारिवारिक हालात ठीक हुई, तो उन्होंने पैसे को प्राथमिकता न देकर, जरुरतमंद महिलाओं के लिए free training camp का आयोजन करके उन्हेंं प्रशिक्षण देकर, उनके हुनर से उनके लिए कमाई का जरिया उपलब्ध कराने को अधिक महत्व दिया। आज उनके भोजपुर महिला कला केंद्र में करीब पचास हजार महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई, बुनाई इत्यादि अलग-अलग हुनर में प्रशिक्षित किया गया है और रोजगार उपलब्ध कराया है। 

इस असाधारण काम को करने के लिए उन्हें कई तकलीफों और विरोधों का भी सामना करना पड़ा है। उन्हें कई महत्वपूर्ण पुरस्कार भी मिले हैं, जिनमें, Woman development corporation, Patna, Brands of India तथा जीजा बाई पुरस्कार, के साथ-साथ रांची के श्री मेला में महिला उद्यमी का सम्मान भी मिला है।

2. चिनू काला- रुबांस फैशन एक्सेसरीज:- 

चिनू काला फोटो वुमन स्टोरी
चिनू काला फोटो वुमन स्टोरी

अनीता जी की तरह ही, एक और Successful Woman entrepreneur है, चीनू काला, जिनका जीवन भी कम संघर्षपूर्ण नहीं रहा है। मात्र पंद्रह वर्ष की आयु में, 300 रुपयों के साथ घर छोड़ने जैसा साहसिक कदम उठाने वाली चिनू, जो कि आज अपने संघर्ष के बल पर करोड़ों की मालकिन है,कभी घर घर जाकर चाकू छूरी जैसा छोटा-मोटा सामान बेचने वाली sales girl रह चुकी है। 

दिन भर काम करने के बाद जो भी कमाई होती थी, उसका एक बड़ा हिस्सा, किराए में चला जाता था। यही नहीं, हमेशा से ही एक Business woman बनने का सपना देखने वाली चिनू ने दो वक्त की रोटी के लिए में वेट्रेस का भी काम किया है।  

सन् 2004 में, उनकी शादी अमित काला से हुई और फिर वे बेंगलुरु शिफ्ट हो गई। उन्होंने Gladrags Mrs India Pageant में participate किया और बिना किसी विशेष प्रशिक्षण और शिक्षा के, वे इस competition में finalist रही थी। 

इसके बाद उन्होंने फैशन जगत में बतौर एक मॉडल के काम करना शुरू किया। नई चीजें सीखते हुए उन्होंने fashion jewelry के क्षेत्र में अपना business शुरू करने का फैसला लिया और फिर साल 2014 में, बेंगलुरु में अपनी कंपनी Rubance Accessories की शुरुआत की। आज उनकी कंपनी का business हैदराबाद और कोच्चि तक पहुंच चुका है। 

आज market में उनकी jewelry का price हजारों रुपयों तक है जिसे लोग काफी पसंद भी करते हैं। छोटे स्तर से शुरु होने वाली उनकी कंपनी का revenue आज करोड़ों रुपयों का हो गया है। इस प्रकार अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर, चिनू ने हर परिस्थिति को मात देकर अपना जीवन संवारा है।

3. मनीषा भाटी-  ड्रीम हंट, इंडिया:-

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CEO and co-founder of Dream Hunt India, आज एक जाना पहचाना नाम है। लेकिन सफलता के इस मुकाम तक पहुंचने के लिए, उन्हें पारिवारिक और सामाजिक जीवन में बहुत अधिक संघर्ष करना पड़ा है। मनीषा भाटी, एक typical conservative family से संबंध रखती है, जहां लिंग भेद तो किया ही जाता है साथ ही परिवार में महिलाओं की स्थिति किसी slave से कम नहीं समझी जाती है। 

घर और बच्चों को संभालना ही महिलाओं का काम समझा जाता है। ऐसे माहौल से निकलकर, पारिवारिक और सामाजिक विरोध का सामना करके अपने दम पर एक company की नींव रखना वाकई एक साहसिक और प्रशंसनीय कार्य है। 

यहां तक पहुंचने की उनकी यात्रा बड़ी ही संघर्ष भरी रही है। केवल लड़कियों को जन्म देने की वजह से उनकी मां को मिलने वाले ताने, पढ़ाई पूरी करके career बनाने की इच्छा होने पर भी मात्र अठारह वर्ष की उम्र में शादी और फिर पांच ही महिने में उस शादी का टूटना तथा सामाजिक दृष्टिकोण इन सबसे मनीषा, परेशान तो हुई लेकिन टूटी नहीं, कुछ समय तक teaching job, करके उन्होंने, world की most top leading investment bank, “Deutsche Bank” में भी job किया। 

फिर उन्होंने अपने Teaching और Banking job के experience का उपयोग करते हुए, Dream Hunt India की स्थापना की जिसका उद्देश्य, career बनाने के लिए, विभिन्न मुद्दों पर  struggle कर रहे  लोगों में confidence जगाकर उनकी career counseling करके उनका personal and professional development करने में help करना है। आज उनकी कंपनी बहुत expand हो चुकी है और उन्हें कई महत्वपूर्ण पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया है, जिनमें Winning brands of India award, Best training institute award from WOW publications आदि प्रमुख हैं।

4. अजैता शाह-  फ्रंटियर मार्केट्स:-

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Safalta ki kahani mahila summary | अजंता शाह

अजैता शाह, आज की उस young generation का हिस्सा है, जो confidence से भरपूर है, जो head strong है और जिसमें सही समय पर सही decisions लेनेे की क्षमता भी है। अमेरिका से International relations में B.A. करने के बाद भी उन्होंने, भारत आकर, Microfinance sector में career बनाने का विचार किया। 

ग्रामीण भागों की परेशानियों को अच्छी तरह समझने वाली, अजैता का ध्यान भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में face की जाने वाली बीजली की समस्या पर था। उन क्षेत्रों में, बीजली का विकल्प, केरोसिन था, जिसकी वजह से परेशानियां ही अधिक थी। उन्होंने सौर ऊर्जा के रूप में बीजली के विकल्प की ओर ध्यान दिया और ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा से चलने वाले लालटेन का practical करके इसके फायदों को समझाया। 

Practically देखने के बाद, सौर उपकरणों के proper उपयोग से अभी तक अनजान रहे और निम्न स्तर के उपकरणों के उपयोग से निराश हो चुके ग्रामीणों में उनके अच्छे products को इस्तेमाल करने की इच्छा जागृत हुई और उनका यह प्रयास काफी सफल रहा। उनके products हाथो हाथ बिक गए और इस सफलता से उत्साहित होकर उन्होंने अपनी कंपनी, Frontier markets की स्थापना की। 

राजस्थान और आंध्र प्रदेश में उनकी company एक भरोसेमंद नाम बनकर उभरी है। यही नहीं, उनकी कंपनी गांव के लोगों से जुड़कर उन्हें रोजगार भी दे रही है। उनकी पांच महिलाओं की टीम “सोलार सहेली” का भी संचालन कर रही है। अपने इस उद्योग के लिए उन्हें वर्ष 2014 में Forbs magazine की top 30 social entrepreneur की लिस्ट में शामिल किया गया था।


तो दोस्तो, यह थी हमारे और आपके ही जैसी कुछ महिलाओं की success stories, यानी उनका फर्श से अर्श तक का सफर जो आज अपने दम पर एक Successful Woman Entrepreneur है। आपको यह लेख कैसा लगा हमे जरूर बताएं। 
धन्यवाद।

By:- Renuka
Image credit:- Canva

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