short story in hindi for kids और hindi kahaniya new पढ़ें! आज हम लाए हैं  हिंदी रोचक कहानी hindi me kahani ( rochak kahani ) एक लापरवाह राजा की। 

 

एक समय की बात है भारत में एक राजा? रहता था, वे अपने आप को बड़ा ही सुंदर समझता था और उसे अपने ऊपर बहुत घमंड था।

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वह घंटों अपने आप को शीशे में देख कर अपना समय गुजारा करता था और हमेशा सोचा था कि इस पूरे संसार में उसके जैसा सुंदर राजा कहीं भी नहीं है, वह अपने लिए सुंदर से सुंदर कपड़े और अच्छे से अच्छे जेवर बनवाता था और उन्हें पहनकर खुद को शीशे में देखकर बड़ा ही प्रसन्न होता था।

 

उस राजा की सारी प्रजा उससे बड़ी परेशान हो गई थी। क्योंकि वह प्रजा की समस्याओं को सुनने के बदले, प्रजा से यह पूछा करता था कि वह कैसा लग रहा है और हर दिन एक से बढ़कर एक नए- नए बालों के स्टाइल बनाकर दरबार में आया करता था।

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जिसके कारण उसके कान पूरी तरह से उसके बालों और जेवरो से ढके रहते थे और प्रजा की बात उस तक नहीं पहुंच पाती थी।

इस राजा में एक कमी थी जो सिर्फ राजा के शाही नाई को ही पता थी, वह बात यह थी कि राजा के कान बिल्कुल गधे के कान जैसे थे, और इसके कारण वह अपने तरह-तरह के बालों की स्टाइल बनाकर अपने कानों को छुपाता रहता था, शाही नाई का नाम मंगू? था।

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मंगू अपने परिवार के साथ जगल के किनारे एक छोटी सी झोपड़ी में रहता था। उसके साथ उसकी पत्नी भी रहती थी जिसका नाम था गंगा?, मंगू को हमेशा यह डर लगा रहता था कि अगर उसने यह बात किसी को बता दी कि राजा के कान देखने में बिल्कुल गधे के कान की तरह है।

 

तो राजा उसे जान से मरवा देगा और अगर उसे नाई के पद से हटा दिया गया तो वह अपने परिवार का पालन पोषण भी नहीं कर पाएगा।

क्योंकि मंगु को राजा के सिवा किसी और से मिलने जुलने का या उसके बाल काटने का भी अधिकार नहीं दिया गया था, राजा के बाल काटने के बाद वे चुपचाप अपनी पत्नी के साथ गांव के किनारे जंगल में बनी अपनी छोटी सी झोपड़ी में रहता था।

 

मंगू इस डर से कि कहीं उसके मुंह से यह बात निकल ना जाए राजा के कान गधे की तरह है। वह खुद भी किसी से नहीं मिलता था, यहां तक कि यह बात छुपाते- छुपाते वह ना ठीक से सो पाता था ना ही खाना खा पाता था।

वह बड़ा ही दुख भरा जीवन बिता रहा था, उसका ऐसा हाल देख कर एक बार उसकी पत्नी गंगा? ने कहा:” “आखिर तुम्हें क्या हो गया है जब से तुम शाही नाई बने हो ना ठीक से खाते हो ना पीते हो ना ही कही जाते हो, ज्यादातर समय हमारे घर के पास बहने वाली नदी को देखने में बिताते हो पहले जब तुम शाही नाई नहीं थे, तो हम ज्यादा खुश रहते थे कम से कम हम लोगों से मिलते- जुलते और अपना समय खुशी से बिताते थे।”

 

नाई ने अपनी पत्नी से कुछ भी नहीं कहा वह दौड़ता हुआ नदी के किनारे चला गया और वहां बैठकर चुपचाप पानी को देखने लगा गंगा बड़ी परेशान हो गई और वह भी मंगू के पीछे- पीछे आ गई नदी के किनारे चारों तरफ इमली के पेड़ लगे हुए थे।

गंगा? बोली:  “मैं तुम्हारी पत्नी हूं आखिर क्या परेशानी है एक बार बताओ तो मैं किसी को नहीं बताऊंगी विश्वास करो”

 

मंगू बोला, “गंगा तुम्हें पता है हमारे महाराज के कान गधे की तरह है, लेकिन अगर मैंने यह बात किसी को भी बता दी तो महराज मुझे मृत्यु दंड दे देंगे, मुझे समझ में नहीं आता कि कहीं मैं किसी के सामने यह बात बोल ना दू, इसलिए मैं किसी से नहीं मिलता लेकिन इसके कारण मैं बहुत दुखी हूं क्योंकि मुझे अपने मित्रों की बहुत याद आती है मैं एक -एक करके सब को खो रहा हूं” और मंगू गंगा को पकड़ कर रोने लगा।?

 

इमली के पेड़? मंगू की कही हुई सारी बातों को अपने अंदर सोख रहे थे, मंगू की पत्नी ने वादा किया कि वह यह बात किसी को नहीं बताएगी, लेकिन जल्दी ही वह यह बात किसी ना किसी को बताने के लिए बेचैन होने लगी।

 


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इसलिए एक दिन वह इमली के पेड़ों के पास गई और वहीं पर चुपचाप धीरे- धीरे पेड़ों को गले लगा कर कहने लगी कि तुम्हें पता है राजा के कान गधे की तरह है, और इस तरह से यह बात पेड़ों? को बताने के बाद उसका मन शांत हो गया और वे अपने घर वापस आ गई।

 

कुछ ही दिनों में शाही उत्सव आ गया और ड्रम बजाने वाले अपने अपने ड्रम लेकर महल के चारों तरफ खड़े हो गए और ज़ोर-ज़ोर से ड्रम बजाने लगे लेकिन यह क्या हुआ कि ड्रमो? के अंदर से एक ही आवाज आने लगी “राजा के कान गधे? की तरह है, राजा के कारण गधे की तरह है, राजा के कारण गधे की तरह है”

 

राजा यह सुनकर बहुत डर गया और उसने तुरंत ही शाही नाइ को बुलाया, मंगू? ने राजा को सारी बात बताई और कहा कि उसने यह बात इमली के पेड़ों सिवाए किसी को नहीं कहीं।

राजा ने ड्रम? बजाने वालों को बुलाया और उनसे पूछा राजा को सारी सच्चाई का पता चल गया वे जान गया कि उसकी सच्चाई को पेड़ों? ने अपने अंदर सोख लिया और जब उसे ड्रम बनाया गया, तो ड्रम की लकड़ियों से यह आवाज़ निकलने लगी।

 

इससे पहले कि वह नाइ? या ड्रम बजाने वालों?‍? को सजा देता, राज्य के मंत्री ने कहा, “इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि राजा के कान कैसे हैं अगर राजा प्रजा को प्यार करता है और उनकी सारी मुसीबतों को दूर करता है”

 

राजा? को सारी बात समझ में आ गईं और उसके बाद वे संसार का सबसे अच्छा राजा बना और उसकी प्रजा को फिर कभी कोई दुख नहीं हुआ और किसी को यह भी याद नहीं आया कि राजा के कारण गधे? की तरह है।

 

Moral of the story in hindi :-

हमें अपने काम को दिल से और अच्छी तरह से करना चाहिए, तब ही हम लोगो की नज़रों में अच्छे इंसान बन पायेंगे, चाहे हम में कितनी भी खामियाँ क्यूँ ना हो!

 

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by Shubhi Gupta ( शुभी गुप्ता )
Story and Poem Writer

Image credits:  www.freepik.com

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