सूर्य नमस्कार योग क्या है? | सूर्य नमस्कार कब और कैसे करें? | Benefits of Surya Namaskar

surya namaskar in hindi

सूर्य नमस्कार 12 योग आसनों का एक समन्वय है आज के इस लेख में आप surya namaskar benefits in hindi और surya namaskar steps के बारे में जाने गए। इस लेख में हमने सूर्य नमस्कार की सारी जानकारी दी है। yoga poses of surya namaskar से आप आसानी से अपने घर के आँगन या छत पर योगा कर सकते है।

“व्यायामात् लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखं।

आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्।।”

शास्त्रों में वर्णित इस श्लोक में व्यायाम के महत्व को समझाया गया है। इस श्लोक के अनुसार, व्यायाम करने से हमें, अच्छा स्वास्थ्य,लंबी आयु, बल और सुख की प्राप्ति होती हैं और यदि हम निरोगी रहते हैं तो ये हमारा परम भाग्य हैं, क्योंकि यदि हमारा स्वास्थ्य अच्छा हो तो, हमारे सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं।

आज की हमारी अत्यंत व्यस्त दिनचर्या में व्यायाम के लिए समय निकालना बहुत मुश्किल तो है, परंतु नामुमकिन बिल्कुल भी नहीं है। योग को व्यायाम का सबसे अच्छा और उत्कृष्ट प्रकार माना गया है।

आज संपूर्ण विश्व, योग के महत्व और लाभ से भलीभांति परिचित हो चुका हैं, और भारत को योग के विश्व गुरु के रुप में देखा जा रहा हैं। योग में ऐसे कई आसन है, जो हमारे शरीर से कई तरह की बिमारियां दूर करने के साथ साथ, शरीर को चुस्त-दुरुस्त और स्वस्थ रखने में सहायता करते हैं।

आज इसी कड़ी में हम बात करेंगे योगासन में सर्वश्रेष्ठ माने जाने वाले सूर्य नमस्कार की, जो कि व्यायाम के साथ साथ ईश्वर की उपासना का भी एक प्रकार है।


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सूर्य नमस्कार क्या है? – What is Surya Namaskar?

प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति में सूर्य को देवता मानकर उसकी उपासना की जाती है। सूर्य इस संपूर्ण सृष्टि की आत्मा है। सूर्य से सृष्टि को जीवन तो मिलता ही है, साथ ही उत्साह, आनंद और गर्मी भी मिलती है।

भारत में धर्म और आरोग्य का मेल करने की परंपरा भी बहुत प्रचलित है। इसलिए,सूर्य नमस्कार को सूर्य की उपासना करने का एक मार्ग माना गया है। भारत में आज भी सूर्य नमस्कार को एक धार्मिक और शास्त्रीय कर्तव्य माना जाता है और कई स्थानों पर नित्य नियम से सूर्य की उपासना हेतु सूर्य नमस्कार किया जाता है।

किसी भी आयु के लोगों के लिए सूर्य नमस्कार अत्यंत लाभदायक होता है। सूर्य नमस्कार को “अष्टांग नमस्कार” या “साष्टांग नमस्कार” भी कहा जाता है। सूर्य नमस्कार में बारह आसन है, जिनका हमारे शरीर और मन दोनों पर ही सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

अतः सूर्य नमस्कार की परिभाषा हम इस प्रकार दे सकते हैं कि, “सूर्य देवता की उपासना हेतु, सूर्योदय के समय, अपने मन, श्वास और शारीरिक गतिविधियों को एक रुप करके, बारह आसनों को क्रमबद्ध तरीके से करने की प्रक्रिया को सूर्य नमस्कार कहते हैं।

सूर्य नमस्कार करने का सही समय (Right time to do surya namaskar)

सूर्य नमस्कार के लिए सबसे अच्छा समय सुबह का समय है। सुबह 5 से 6 बजे के बीच। सूर्य नमस्कार खाली पेट करना चाहिए। सूर्य नमस्कार पूर्व की और मुँह करके करना चाहिए। सूर्य की किरणें शरीर और दिमाग पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। 

सूर्य नमस्कार के 12 आसन (12 Poses of Surya namaskar in hindi)

सूर्य नमस्कार में योगासन के लगभग सभी महत्वपूर्ण आसनों का समावेश होता है। सूर्य नमस्कार की संपूर्ण प्रक्रिया बारह चरणों में, एक विशिष्ट क्रम में पूर्ण होती है जो इस प्रकार है।

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1. प्रणामासन

2. हस्त उत्तानासन

3. पाद हस्तासन

4. अश्वसंचालनासन

5. पर्वतासन

6. अष्टांग नमस्कार

7. भुजंगासन

8. पर्वतासन

9. अश्वसंचालनासन

10. पादहस्तासन

11. हस्त उत्तानासन

12. प्रणामासन

सूर्य नमस्कार के मंत्र कौन से हैं (Mantra of Surya namaskar, in hindi)

सूर्य नमस्कार करते समय बारह मंत्र बोले जाते हैं। प्रत्येक मंत्र का एक ही सरल अर्थ है- सूर्य को मेरा नमस्कार है। सूर्य नमस्कार के बारह आसनों में इन मंत्रों का उचारण किया जाता है। 

ॐ मित्राय नमः।

 ॐ रवये नमः।

 ॐ सूर्याय नमः।

ॐ भानवे नमः।

ॐ खगाय नमः।

ॐ पूष्णे नमः।

ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।

ॐ मरीचये नमः। 

ॐ आदित्याय नमः।

ॐ सवित्रे नमः।

ॐ अर्काय नमः।

ॐ भास्कराय नमः।

ॐ श्रीसवितृसूर्यनारायणाय नमः।

आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने।

आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते ॥

जो लोग प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करते हैं, उनकी आयु, प्रज्ञा, बल, वीर्य और तेज बढ़ता है।

सूर्य नमस्कार के फायदे (Benefits of Surya namaskar in hindi)

आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने ।

जन्मान्तरसहस्रेषु दारिद्र्यं नोपजायते ।।

इस श्लोक का अर्थ यह है कि, चूंकि सूर्य यह ऊर्जा के देवता और सृष्टि के रक्षक है, इसलिए जो भी प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करता है, वह हजारों वर्षों तक दरिद्र नहीं हो सकता है।

सूर्य नमस्कार का हमारे शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। जैसा कि हमने देखा कि सूर्य नमस्कार की प्रक्रिय एक निश्चित चरण में पूर्ण होती हैं, अतः उसके सभी आसनों का शरीर के विभिन्न अंगों पर असर होता है, शरीर की क्रियाशीलता बढ़ती है, और अंतड़ियों की कार्यशीलता भी बढ़ती है।

शरीर के सभी अंगों तक रक्त की आपूर्ति सही तरीके से होती है जिससे हम बिमारियों से दूर रहते हैं और हृदय और फेफड़े भी स्वस्थ रहते है। सूर्य नमस्कार के विभिन्न आसनों से हमारा श्वसन तंत्र भी मजबूत होता है और श्वसन संबंधी विकार भी नहीं होते हैं। अब हम विस्तारपूर्वक देखते हैं कि सूर्य नमस्कार का हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है।

1. सूर्य नमस्कार से हमारे शरीर की अनावश्यक चर्बी कम होती है, जिससे मोटापे से संबंधित बिमारियों जैसे हृदय रोग, मधुमेह और ब्लड प्रेशर आदि से हम बच सकते हैं।

2. नियमित रूप से सूर्य नमस्कार करने से पाचन तंत्र मजबूत होकर, हमारी पाचन-क्रिया में सुधार होता है।

3. सूर्य नमस्कार करने से हमारा रेस्पिरेटरी सिस्टम सही रहता है।

4. महिलाओं की प्रमुख शारिरिक समस्याओं जैसे अनियमित मासिक धर्म, थकान, चिड़चिड़ापन, शारिरिक दर्द, हार्मोन संबंधी समस्याओं इत्यादि में आराम मिलता है।

5. सूर्य नमस्कार हमें तनाव मुक्त जीवन जीने में सहायता करता है। सूर्य नमस्कार से हमारी एकाग्रता बढ़ती है, और हमारा मानसिक स्वास्थ्य भी ठीक रहता है।

6. सूर्य नमस्कार से हमारी मांसपेशियों में भी मजबूती आती है और उनकी क्रियाशिलता भी बढ़ती है। साथ ही रीढ की हड्डी भी मजबूत होती है।

7. त्वचा और बालों से संबंधीत विभिन्न रोगों में भी नियमित सूर्य नमस्कार से फायदा होता है।

8. नियमित सूर्य नमस्कार करने से पीठ,हाथों और पैरों का दर्द कम होता है और साथ ही छाती और बाहों की मजबूती भी बढ़ती है।

9. सूर्य नमस्कार करने से अल्सर, अतिनिंद्रा, अल्पनिंद्रा, इत्यादि विकारों से भी हम दूर रहते हैं।

10. नियमित रुप से सूर्य नमस्कार करने से शरीर को डिटॉक्स करने में भी सहायता मिलती है। शरीर से नुकसानदेह तत्व पसीने के साथ बाहर निकल जाते हैं और शारीरिक सुंदरता बढ़ती है।

अब आप सूर्य नमस्कार के फायदे तो जान ही गए होंगे, परंतु सूर्य नमस्कार करने के कुछ कायदे भी है जो इस प्रकार है।

सूर्य नमस्कार करते समय सावधानियां (Surya Namaskar ki savdhaniya)

1. सूर्य नमस्कार करने के कुछ नियम भी है, जिन्हें हमें ध्यान में रखना बहुत ज़रूरी है, ताकि हमें इसके लाभ के बजाय नुकसान ना हो जाए।

2. हो सके तो सूर्य नमस्कार हमेशा ही सुबह जल्दी या सूर्योदय के समय ही करे।

3. गर्भवती स्त्रियों को सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए।

4. जिन लोगों को कमर या रीढ़ की हड्डी में दर्द या विकार है उन्हें सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए।

5. जिन्हें उच्च रक्त दाब की समस्या है उन्हें एक सीमा में रहकर ही सूर्य नमस्कार करना चाहिए।

6. बुखार इत्यादि में भी सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए।

7. मासिक धर्म में भी महिलाओं को सूर्य नमस्कार नहीं करने की सलाह दी जाती है।

निष्कर्ष:-

सूर्य नमस्कार पूर्ण योगासन है। यदि कोई सूर्य नमस्कार रोज करता है तो उसे किसी अन्य व्यायाम या योगासन का अभ्यास करने की आवश्यकता नहीं है। सूर्य नमस्कार उनके लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जो व्यायाम के लिए अधिक समय नहीं दे पाते हैं, क्योंकि सूर्य नमस्कार करने में बहुत कम समय लगता है। सूर्य नमस्कार करने में लगभग 5-10 मिनट लगते हैं और यह एक सामान्य व्यक्ति के लिए पर्याप्त है।

सूर्य नमस्कार का अभ्यास अपने डॉक्टर और योग शिक्षक से परामर्श करने के बाद ही करें। और हमे जरूर बताएं, आपको हमारा यह लेख कैसा लगा ?

Article by
Renuka Raje
Lifewingz.com

Image credit:- pixabay, canva

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