immunity power kaise badhaye, इसका जवाब इस Vata pitta kapha लेख में पढने को मिलेगा। जो भारत के आयुर्वेद में पहले से ही बताया गया है। इस लेख में भारत के ayurveda के त्रिदोष सिद्धांत ( Vata pitta kapha – Tridosha theory ) को सरल शब्दों में समझाया गया है। ये लेख आपके लिए है, अगर आप की queries ये सब है- वात पित्त और कफ क्या है, pitta doshas, balanced nutrition diet plan in hindi आदि।

 

वात पित्त और कफ ( vata pitta kapha ) क्या है ? क्या आप इसके बारे में जानते है? क्या आप आयुर्वेद के ज्ञाता महर्षि वाग्भट्ट जी का त्रिदोष सिद्धांत के बारे में जानते हैं?

हम स्वस्थ कैसे रह सकते हैं? या अपने शरीर को स्वस्थ कैसे रखें? अगर आप स्वस्थ रहने के उपाय और नियम से अपने शरीर को निरोग और स्वस्थ बनाने के इच्छुक हैं तो इस लेख को पूरा पढ़ें। और tridosha theory को अपने जीवन में उतारें।

 

दोस्तों, आप सब इतना तो जानते ही होगें कि पुराने समय में लोग कम बीमार ( fever ) हुआ करते थे। क्या आपको इसका कारण पता है कि आखिर वो ऐसा क्या खाते थे या ऐसा क्या करते जिसकी वजह से वह healthy life जिया करते थे। हमारे पूर्वज जो balanced diet की पालना करते थे, उसमे ऐसा क्या था?

Rajiv Dixit ji  और Dr. Biswaroop roy choudhury जी ने भी कहा है कि भारत के पहले समय में dibetes, thyroid, blood pressure, मानसिक बीमारी और कैंसर जैसी बीमारी ना के बराबर हुआ करती थी और वह 100 से भी ज्यादा वर्ष तक जिया करते थे।


हाल ही में मशहूर Dr. Biswaroop choudhury  ने पौधा आधारित आहार ( plant based diet ) यानी कच्ची सब्जियां, फल, जूस, स्प्राउट्स, ड्राई फ्रूट्स आदि का सेवन करने की सलाह दी है।  जिससे आजकल की बीमारियाँ, जैसे डायबिटीज, हार्ट अटैक, बीपी, कैंसर, मोटापा आदि पर बिना दवाइयों से काबू किया जा सकता है।  ये ही वात पित्त कफ का इलाज है। 


लेकिन आज के इस medical science के युग में इतनी medical facility होने के बावजूद भी हर दूसरे व्यक्ति को blood pressure, dibetes, thyroid आदि बीमारियों ने जकड़ा हुआ है।

आखिर इसके पीछे क्या कारण थे? वह healthy life कैसे जीते थे? उनका balanced diet plan क्या था?

 

तो चलिए हम जानते है कि हमारे बुजुर्ग कैसे इतना लम्बा और स्वस्थ जीवन जिया करते थे:-




दोस्तों, हमने कई गाँव के बुजुर्गों से बात की। उन्होंने कहा वो कम और सादा खाना खाते थे। वो जब खाना बनाते थे, तो मिर्च मसाला बहुत कम डालते थे। तला हुआ भोजन बहुत कम करते थे।

हमारे बुजुर्ग बहुत ही सरल जीवन जीते थे वो अपने शरीर के ऊर्जावान त्रिदोष को नियंत्रित रखते थे। जिनको हम सब वात, पित्त और कफ ( vat pit kaf ) के नाम से जानते है।

‘ त्रिदोष सिद्धान्त ’ आयुर्वेद की अद्भुत खोज है, जो कि वैज्ञानिक सिद्धान्त पर आधारित है और जिसके सहारे कई चिकित्सा पूर्ण होती हैं। Gharelu nuskhe एक छोटा सा हिस्सा है इस सिद्धांत का!

” आयुर्वेद ( ayurveda books ) का कहना है कि जब वात, पित्त और कफ imbalance होते हैं, तब हम बीमार पढ़ते हैं। “

 

दोस्तों, इन त्रिदोष का प्रभाव हमेशा हमारे शरीर पर रहता है। आज के इस article में हम आपका परिचय वात,  पित्त और कफ से करवायंगे। बहुत गहराई से जानने की जरूरत नहीं है मोटे तौर से जानते हैं कि आखिर वात, पित्त और कफ किया है, और इनको ध्यान में रखकर हम सब कैसे अपनी सेहत को इतना मजबूत बना दें ताकि कोई भी बीमारी आपको छूह भी ना सके।

 

पहले हम जानते है कि कौन से दोष ( vata pitta kapha ) का प्रभाव हमारे कौन- कौन से अंग पर होता है:-

 

1. कफ दोष ( kapha dosha ):  सिर से लेकर छाती तक जितनी भी बीमारियाँ होती हैं वो कफ के बिगड़ने की वजह से होती हैं। कफ का प्रभाव रात को अधिक होता है।

2. पित्त दोष ( pitta doshas ):  छाती से लेकर कमर, पेट के निचले हिस्से तक जितनी भी बीमारियाँ होती है। वो पित्त के बिगड़ने की वजह से होती हैं। पित्त का प्रभाव दोपहर को होता है।

3. वात दोष ( vata dosh ):   कमर से लेकर घुटने पैर के निचले हिस्से तक जितनी भी बीमारियाँ होती है। वह सब वात के कुपित होने की वजह से होती है वात का प्रभाव सुबह सबसे ज्यादा रहता है।

 

तो चलिए जानते है कि इन त्रिदोष Vata Pitta Kapha के कारण, लक्षण और उपाय क्या है?

 

[A] वात दोष ( vat dosh ):-

सबसे पहले हम बात करेंगे वात के बारे में:-

1. वात दोष किया होता है?

2. वात दोष बढ़ने के कारण?

3. वात दोष बढ़ने के लक्षण क्या होते है? और

4. Vata dosha के उपाय क्या है?

 

1. वात दोष क्या है? ( vata dosha kya hota hai ):-

वात दोष “वायु” और “आकाश” इन दो तत्वों से मिलकर बना है। वात या वायु दोष को तीनों दोषों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। वात की शुष्क, शीत, प्रकाश के गुणों की विशेषता है। यह आपके आंतों के माध्यम से आपके दिमाग, श्वास, रक्त प्रवाह, दिल के कार्य और bad toxins के बनने की क्षमता को भी नियंत्रित करता है।

वात दोष संतुलन से बाहर होने पर, भय, चिंता, अकेलापन और थकावट का कारण बनता है। यह शारीरिक और ऊर्जावान कमी दोनों को जन्म दे सकता है, उचित संचार को बाधित कर सकता है, और शरीर में सभी प्रकार के Abnormal movements का कारण बन सकता है।

 

2. वात दोष बढ़ने के कारण क्या होते है? ( vata dosha ke karan):-

यह हमारे खानपान, स्वभाव और आदतों की वजह से बिगड़ जाता है। तो चलिए जानते है, वात के बढ़ने के प्रमुख कारण क्या है।

-अति परिश्रम करना।
-अति व्यायाम करना।
-अधिक बोलना।
-अधिक पैदल चलना अथवा वाहनों में घूमना।
-दिन में सोना और रात्रि में देर तक जगना।
-भार उठाना।
-अति उपवास करना।

 

3. चलिए अब जानते है कि वात दोष के मुख्य लक्षण क्या है ? ( symptoms of vata dosha ):-

अगर आपको वात के सही लक्षणों के बारे में पता हो तो आप आसानी से इसका पता लगा सकते हैं और समय पर इससे छुटकारा पा सकते हैं। नीचे लिखे vata dosha के मुख्य लक्षण है:-

-क़ब्ज़ की समस्या।
-गैस की प्रॉब्लम
-पानी की कमी।
-सूखी रूखी त्वचा होना।
-शरीर में दर्द रहना।
-मुख में खट्टे व कसैला स्वाद आना।
-कमज़ोरी, थकान महसूस करना।
-अंगो का कंपन होना।
-ज़्यादा ठण्ड लगना/ गर्माहट की चाह।
-मांसपेशियों में थकान रहना।
-वजन कम होना।
-मरोड़ का एहसास होना।
-ऐठन ।

 

4. जानते हैं किस तरह से आप वात दोष को संतुलित रख सकते है। ( vata dosha diet in hindi )

Vat dosh ka ilaj या संतुलित करने के लिए आपको अपने खानपान और जीवनशैली में बदलाव लाने होंगे।  आपको उन कारणों को दूर करना होगा जिनकी वजह से वात बढ़ रहा है। वात प्रकृति वाले लोगों को खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि गलत खानपान से तुरंत वात बढ़ जाता है। खानपान में किये गए बदलाव जल्दी असर दिखाते हैं।

1. सभी dairy product वात को शांत करते हैं। दूध को हमेशा पीने से पहले उबाल लें और इसे गर्म करके पीएं। पूर्ण भोजन के साथ दूध ना पिएं।

2. Swami Ram Dev Baba जी के अनुसार वात दोष को ठीक करने के लिए त्रिफला भी आपकी मदद कर सकता है और इसे काफी प्रभावी उपचार माना गया है। त्रिफला पेट की अन्य बीमारियों को ठीक करने में सहायक है।

आप त्रिफला चाय या फिर सुबह- सुबह खाली पेट ताजे पानी के साथ Triphala Powder का सेवन कर सकते हैं।

3. वात को संतुलित करने के लिए आपको वसा लेना चाहिए। अपने भोजन में घी, तेल और फैट वाली चीजों को शामिल करें।

4. वात को संतुलित करने के लिए चावल और गेहूं का सेवन करे। जौ, मक्का, बाजरा, एक प्रकार का अनाज, राई और जई का सेवन कम करें।

5. फलों में आप संतरे, केला, एवोकाडो, अंगूर, चेरी, आड़ू, खरबूजे, जामुन, आलूबुखारा, अनानास, आम और पपीते का सेवन कर सकते है। कुछ फल जैसे सेब, नाशपाती, अनार, क्रैनबेरी, और सूखे मेवे कम खाएं।

6. चुकंदर, खीरे, गाजर, और शकरकंद आदि सब्जियों का नियमित सेवन करें।

7. Cold coffee, Black tea, Green tea, फलों के जूस आदि ना पियें।

8. सुबह एक चुटकी जायफल पाउडर को शहद में मिलाकर खाएं। वात को संतुलित करने के लिए

यह सबसे अच्छा उपाय है।

9. अपने रोज़मर्रा के खाने में लहसुन, अदरक और जायफल को शामिल करने से आप अपने वात दोष को संतुलित कर सकते हैं।

10. वात को संतुलित करने के लिए रोज़ाना गुड़ का सेवन करें।


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[B] पित्त दोष ( pitta dosh ):-

अब हम जानते है त्रिदोष के दुसरे दोष पित्त दोष के बारे में:-

1. पित्त दोष किया होता है? ( pitta dosha kya hai )

2. पित्त दोष बढ़ने के कारण।

3. पित्त दोष के लक्षण क्या होते है और,

4. पित्त दोष के उपाय क्या है?




1. पित्त दोष क्या है? ( Pitta dosha kya hai ):-

Pitta dosha – आयुर्वेद में पित्त का वर्णन खट्टापन, नमी, गर्मी, ऊर्जा, तेज और अग्नि से किया गया है। पित्त metabolism  और शरीर में होने वाले परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिए तीन दोषों में से एक है।

पित्त मन और शरीर में सभी गर्मी, चयापचय ( metabolism ) और परिवर्तन को नियंत्रित करता है। यह नियंत्रित करता है कि हम खाद्य पदार्थों को कैसे पचाते हैं, पित्त शरीर के महत्वपूर्ण पाचन “अग्नि” को नियंत्रित करता है।

 

2. पित्त दोष के मुख्य कारण निम्नलिखित होते हैं ( Pitta dosha ke karan ):- 

-कड़वा, खट्टा, गर्म अधिक मिर्ची वाले भोजन का सेवन करना।
-तला व तेज मसालेदार भोजन करना।
-नशीले पदार्थों का सेवन करना।
-ज्यादा देर तक तेज धूप में रहना।
-अधिक नमक का सेवन करना।
-पानी का सेवन कम करना।
-वसा युक्त भोजन खाना।

 

3. पित्त के सामान्य लक्षण  ( Symptoms of Pitta Imbalance ):-

-अधिक भूख-प्यास।
-सीने में जलन, एसिडिटी।
-आँखे, हाथों व तलवों में जलन।
-त्वचा में दाने, मुहाँसे, फुंसी निराशा।
-पित्त की उल्टी।
-सिर दर्द, जी मचलाना।
-दस्त।
-मुख में कड़वा स्वाद।
-ज़्यादा गर्मी लगना।




4. जानिए पित्त दोष का उपचार और संतुलित रखने के लिए क्या उपाय है ( pitta dosha diet , home remedies for pitta ):-

1. दूध, मक्खन और घी, ये तीनों ही पित्त को शांत करने के लिए सबसे अच्छे माने गए हैं।

2. हमेशा सुबह खाली पेट 2 गिलास गुनगुना पानी पिएं। शरीर में पित्त कम करने के लिए यह सबसे अच्छा उपाय है।

3 . जीरा एक Anti acid के रूप में काम करता है जीरा पाचन क्रिया में सुधार करता है। भुने हुए जीरे का पाउडर बनाकर खाना खाने के बाद एक गिलास पानी में मिलाकर लें।

इसके अलावा आप जीरे के दानों को पानी में उबालकर भी उसका सेवन कर सकते हैं। जीरा पित्त के संतुलन में काफी सहायक होता है।

4. आंवला स्वाभाविक रूप से पित्त को शांत करने के लिए प्रभावी है जो पित्त के लिए सबसे अच्छा घरेलू उपचार में से एक है। आप दिन में एक आंवला फल खा सकते हैं।

आंवला पित्त, अम्लता (acid reflux or acidity ) को कम करता है और पाचन की प्रक्रिया को बेहतर बनाता है। या फिर आप आंवले के चूर्ण का इस्तेमाल कर सकते है आंवले के चूर्ण को रोज एक गिलास पानी के साथ लेने से आप पित्त की समस्या से निजात पा सकते हैं।

5. अजवाइन (Ajwain )पित्त को शांत करती है। Rajivdixit जी ने भी कहा है कि अजवाइन जो है पित्त नाशक है। आप अपने दिन के खाने में अजवाइन का उपयोग करें। क्योंकि दिन के समय में पित्त बढ़ता है और पित्त को संतुलित करने के लिए अजवाइन का सेवन करें।

6. हींग ( hing) का सेवन करना बहुत फ़ायदेमंद है। हींग खाने से पित्त की समस्या से छुटकारा पा सकते। हाजमा खराब होने या पेट संबंधी अन्य विक़ार होने पर इसके चूर्ण का सेवन लाभदायक होगा।

7. आयुर्वेद में तुलसी को उत्तम माना गया है क्युकि यह शरीर की बहुत सी बीमारियों को ठीक करती है। पित्त दोष को संतुलित रखने के लिए नियमित रूप से 2-3 तुलसी के पत्ते चबाने से पित्त की समस्या दूर हो जाती है।

8. शरीर से पित्त को हटाने के लिए सेब, खुबानी, जामुन, चेरी, नाशपाती,संतरा, तरबूज, तरबूज, स्ट्रॉबेरी, अंजीर और अंगूर आदि फल  फायदेमंद है

9. ब्राह्मी बहुत ही अच्छी औषधि है पित्त दोष को संतुलित करने के लिए ब्राह्मी का उपयोग करे। ब्राह्मी को brain tonic के नाम से भी जाना जाता है। ब्राह्मी अपनी ठंडी प्रवृत्ति के कारण शरीर में पित्त दोष को संतुलित करती है और शरीर को ठंडा रखती है। और इस से शरीर में चयापचय क्रिया सही तरह से काम करती है।

10. Meditation और yoga से आप पित्त दोष को संतुलित रख सकते है। शरीर में पित्त दोष के लिए मुख्य स्थल छोटी आंत ( intestine ) , यकृत ( liver ) और नाभि क्षेत्र हैं, इसलिए नाभि और सौर जाल पर ध्यान देना चाहिए।

आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार, इन क्षेत्रों को खोलने वाले आसन गर्मी और तनाव को छोड़ेंगे और पित्त कम करने में मदद करेंगे।

इसलिए, पेट के backbends, जैसे भुजंगासन ( कोबरा ), धनुरासन ( धनुष ), Matsyasana (मछली)  विशेष रूप से  pitta के लिए वरदान है।


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[C] कफ दोष ( kapha dosha ):-

तो चलिए अब Vata pitta kapha का आखरी दोष कफ दोष का बारे में जानते है:-

1. कफ दोष बढ़ने के कारण क्या है?

2. कफ दोष बढ़ने के लक्षण क्या होते है? और

3. Kapha dosha के उपाय क्या है?




1. कफ दोष क्या है? ( kapha dosha kya hota hai ):-

आयुर्वेद ( tridosha theory ) में कफ के लिए शांत, मुलायम, नम, पतला, भारी और स्थिर आदि शब्दों का उपयोग किया जाता है। शरीर और मस्तिष्क के विकास के लिए कफ जरूरी है। अगर शरीर में कफ संतुलित होता है तो व्यक्ति का मन और दिमाग शांत रहता है।

कफ आपके शरीर में त्वचा को नमी देने, जोड़ों को चिकना करने, Libido बढ़ाने और Immunity बढ़ाने में सहायक होता है।

कफ Body nutrition देने के अलावा बाकी दोनों दोषों ( वात और पित्त ) को भी control करता है। कफ की कमी होने के कारण ये दोनों दोष अपने आप ही बढ़ जाते हैं। इसलिए शरीर में कफ का संतुलित अवस्था में रहना बहुत ज़रूरी है।

 

2. कफ दोष बढ़ने के कारण क्या है? ( kapha dosha causes ):-

शरीर में कफ दोष बढ़ने के कई कारण होते है तो चलिए जानते है कफ दोष के प्रमुख कारण क्या है:-

-मीठे, खट्टे और चिकनाई युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन।
-मांस-मछली का अधिक सेवन।
-फ्रिज का पानी पीना।
-व्यायाम ना करना।
-दूध-दही, घी आदि का अत्याधिक सेवन।
-बहुत ज्यादा सोने से।
-ठंडे और बारिश के मौसम में ज्‍यादा समय बिताना।

 

3. कफ दोष बढ़ने  के लक्षण ( symptoms of kapha dosha ):-

शरीर में कफ दोष बढ़ने से शरीर में कई लक्षण देखे जा सकते है जो चलिए जानते है कफ दोष के प्रमुख लक्षण क्या है?

-हमेशा सुस्त रहना, ज्यादा नींद आना।
-शरीर में भारीपन।
-आंखों और नाक से अधिक गंदगी का स्राव।
-सांस की तकलीफ़।
-डिप्रेशन।
-खांसी के साथ कफ आना।
-साइनस का दर्द।
-पेशाब और पसीना असंतुलित हो जाना।
-त्‍वचा का पीला होना।
-शरीर का वजन बढ़ना।

 

4. अब हम बात करें कि किस तरह से आप कफ दोष का इलाज और संतुलित रख सकते है। ( diet for kapha dosha ):-




1. मीठा कम खाएँ, मीठा खाने से कफ दोष बढ़ता है।

2. कफ दोष को ठीक करने के लिए तीखे, कड़वे और गर्म खाद्य पदार्थों का सेवन करें।

3. कफ को नियंत्रित करने की ताकत गाय के दूध में है, गाय का दूध कफ को शांत करता है। इस लिए रात के समय गाय के दूध का सेवन करें।

4. रोज़ाना व्‍यायाम जरूर करें।

5. धनिया और अदरक को पानी में उबालकर हलका गरम करके पीएँ। यह कफ को शांत करता है।

6. कम वसा ( low fat diet ) वाला भोजन।

7. दिन की नींद से बचें।

8. आप उबली या कच्ची सब्जियां, पके फल, अनाज जैसे जई, राई, जौ और बाजरा, शहद और कुछ strong spices जैसे काली मिर्च, इलायची, लौंग, सरसों और हल्दी आदि का सेवन भी कर सकते है।

9. Vata pitta kapha expert, Dr. Dhanvantri Tyagi,  के अनुसार, “कफ दोष वालों को अपने दैनिक आहार में वसा, दूध और चावल से बचना चाहिए, लेकिन कभी-कभी इनका सेवन कर सकते हैं।”

10. Rajiv Dixit ji  के अनुसार गुड़, शहद, सोंठ कफ ख़त्म में कारगार है। सोंठ अदरक को सुखा कर बनाई जाती हैं। अदरक के सूखने के बाद उसके गुण लगभग 100 गुना बढ़ जाता हैं।

इसलिए सोंठ अदरक से हमेशा ही अच्छी हैं।  तो कफ ख़त्म करने के लिए रसोई घर में पहला हो गया गूढ़, दूसरा शहद, तीसरा सोंठ। यह कफ ख़त्म करने के लिए सर्वश्रेष्ठ औषधि मानी हैं।

 

वात, पित्त और कफ ( vata pitta kapha )को बिगड़ने से बचाने के लिए रखें इन बातों का भी ख्याल।

1. सुबह तथा शाम को सैर करने से पित्त संतुलित होता है।

2. रोज़ाना 7-8 गिलास पानी पिए। लकिन ठंडा पानी पिने से बचें।

3. दोपहर में एक से डेढ़ बजे के बीच दोपहर का भोजन अवश्य कर लेना चाहिए क्योंकि यह यह पित्त का  समय होता है, जब पाचक अग्नि पर्याप्त होती है।

4. भोजन के बाद 10-15 मिनट आराम करना चाहिए। या थोड़ी देर टहलें इससे पाचन में मदद मिलती है।

5. चाय, कॉफ़ी और cold drink का सेवन कम करें।

6. हर बार ताजा भोजन ही खाएं।

7. बाहर का खाना बंद करें।

8. Packet में बंद और Processed food को avoid करें।

9. साधा भोजन ही खाएं।

10. Non-vegetarian food से परहेज़ करें।

11. Stress से दूर रहें ।

12. Exercise और yoga करें।

 

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दोस्तों, आज के हमारे इस article में आपने जाना शरीर के तीन ऊर्जावान बलों के बारे में जिनका हमारे शरीर पर हर समय असर रहता है। अगर इन त्रिदोष में से एक भी असंतुलित हो जाता है तो उसका असर दूसरें बचे हुए दोषों पर भी पड़ता है इसलिए हमे इन त्रिदोष को हमेशा संतुलित में रखना होगा। ताकि हम हमेशा स्वास्थ्य रहे।

अगर आप इन त्रिदोषों को अच्छे से समझ जाएँ। तो हम अपनी lifestyle को आयुर्वेद के नियम के अनुसार बनाते है तो Definitely आप रोगों से बचाव करके एक लंबी और खुशहाल जीवन जी सकते है।

 

हम उम्मीद करते हैं कि हमारा ये Article vata pitta kapha आपको पसंद आया होगा। और आपको आपके प्रशन  swasth rahne ke upay का उत्तर मिला होगा और इस Article से आपको के बारे में काफी जानकारी मिली होगी!

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धन्यवाद!

 

Article by
Mehak and Poonam
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