Devo ke dev mahadev – भगवान शिव के गले मे मुंड माला से जुड़े रहस्य

rudraksha mala benefits in hindi

हम सब जानते है देवों के देव Devo ke dev mahadev संसार के कण-कण में मौजूद है। भगवान Shiv की महिमा जिस तरह अपरम्पार है shiv का स्वरूप भी उतना ही attractive है। Shiv Puran के अनुसार bhagwan shiv जो कुछ भी अपने body पर धारण करते हैं, उसके पीछे कोई न कोई secret छिपा है। Shiv त्रिशूल, जटा, नाग, चंद्रमा, मुंडमाला आदि धारण करते हैं। हम आपको बताएंगे कि शिव के गले में पड़ी mundamala का रहस्य।

 

108 सिरों की मुंडमाला का रहस्य – Secrets of 108 Mundamala-

 

1. एक बार नारद मुनि के उकसाने पर सती माता ने शिवजी से ज़िद्द करके मुंडमाला का secret जानना चाहा। Shivji के काफी समझाने पर सती नहीं मानी तो Shiv ने Sati से कहा कि इस मुंड की माला में जितने भी मुंड यानी सिर हैं वह सभी आपके हैं। सती जी इस बात को सुनकर surprised रह गयी।

 

2. Sati Ji ने भगवान Shiv से पूछा, यह भला कैसे possible है कि सभी मुंड मेरे हैं। इस पर Shiv बोले यह आपका 108 वां जन्म है। इससे पहले आप 107 बार जन्म लेकर शरीर त्याग चुकी हैं और ये सभी मुंड उन पूर्व जन्मों की निशानी है।

 

3. इस mala में अभी एक मुंड की कमी है इसके बाद यह mala पूर्ण हो जाएगी। Shiv की इस बात को सुनकर सती ने शिव से कहा मैं बार-बार जन्म लेकर शरीर त्याग करती हूं लेकिन आप शरीर त्याग क्यों नहीं करते।

 

4. Shiv हंसते हुए बोले ‘मैं अमर कथा जानता हूं इसलिए मुझे शरीर का त्याग नहीं करना पड़ता।’ इस पर Sati ने भी अमर कथा जानने की इच्छा प्रकट की। शिव जब सती को कथा सुनाने लगे तो उन्हें नींद आ गयी और वह कथा सुन नहीं पायी। इसलिए उन्हें दक्ष के यज्ञ कुंड में कूदकर अपने शरीर का त्याग करना पड़ा।

 

5. Sati के आत्मदाह के बाद shankar भगवान ने उनके body के parts से 51 पीठों का निर्माण किया, लेकिन shiv ने सती के मुंड को अपनी mala में गूंथ लिया। इस तरह 108 मुंड की माला shiv ने पूर्ण करके धारण कर ली।

 

हालांकि बाद में, sati का अगला जन्म पार्वती के रूप में हुआ। इस जन्म में parvati को अमरत्व प्राप्त हुआ और फिर उन्हें शरीर का त्याग नहीं करना पड़ा।

 

नरमुंड माला के लाभ:-

narmund mala

narmund mala देवी सती के मुंड का स्वरूप बना है, इस प्रकार इस माला को धारण करने से bhagwan shiva और उनकी अर्धांग्‍निी देवी सती का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस माला को धारण करने वाले व्‍यक्‍ति को सदा शिव और शक्‍ति की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

 

यदि किसी व्‍यक्‍ति की जन्मकुंडली में शुक्र ग्रह खराब है, तो उस व्‍यक्‍ति को जीवन में सुख-सुविधाएं का सुख प्राप्त नहीं होता है, जीवन में एक प्रकार से दरिद्रता आने लगती है, इसलिए शुक्र घर को मज़बूत करने के लिए नरमुंड माला धारण की जा सकती है, ये माला कुंडली में बैठे अशुभ शुक्र के दोष को नष्ट करके शुभ शुक्र ग्रह के बल को मजबूत करती है।

 

नरमुंड माला के प्रभाव से शनि ग्रह का प्रकोप शांत होता है। क्योंकि शनि देव शिव भगवान के शिष्य माने गए हैं, इस माला को धारण करने वाले व्‍यक्‍ति को शिव सुरक्षा प्रदान करते हैं।

 

नरमुंड माला { Narmund Mala } को धारण करने वाले व्‍यक्‍ति पर मां काली का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है, क्योंकि काल की पत्नी को महाकाली कहा गया है।

 

महाकाली भी अपने गले में सिद्ध नरमुंड माला को धारण करती हैं, इसलिए जो भक्‍त मां काली में श्रद्धा रखता है, वह इस माला को धारण कर इसके लाभ प्राप्‍त कर सकता है। इस माला को धारण करने से शत्रु से रक्षा मिलती है और शत्रु परास्‍त होते हैं।

 

सिद्ध नरमुंड माला को कैसे धारण करे?

 

शनिवार के दिन शाम के समय 6 बजे से 10 बजे के बीच के समय, घर के मंदिर में, सिद्ध नरमुंड माला को लाल वस्त्र पर रखे और तेल का दीपक जलाकर, निम्नलिखित मन्त्र बोलते हुए 108 चावल पर चढायें, तत्पश्चात माला को गले में धारण करे या साधना में उपयोग करे।

मन्त्र:

।। ॐ तत्‍पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्‍नो रुद्र प्रचोदयात्।।

 

 

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