Benefit of kapalbhati in hindi | जानिए, कपालभाति प्राणायाम करने का तरीका


इस लेख में आप जानेंगे kapalbhati pranayama करने के फायदे (benefits of kapalbhati pranayama in hindi) और कपालभाति प्राणायाम कैसे करें (kapalbhati pranayama steps) उसकी सही जानकारी।



दोस्तों, भारतीय योग शास्त्र और योग संस्कृति इतनी प्राचीन और समृद्धशाली है कि, आज न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में ही इसे सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। और पूरी दुनिया भारत को योग का विश्व गुरु मानती हैं। 

योग का अर्थ है, शरीर और मन का संतुलन। वैसे योग शब्द, संस्कृत भाषा में युज् से आया है, जिसका अर्थ होता है जोड़ना। अर्थात, हम इसका अर्थ यह भी निकाल सकते हैं कि, परमात्मा से आत्मा का जोड़, मन से मस्तिष्क का जोड़ या शरीर, मन और आत्मा का जोड़ ही योग हैं जो हमें परमात्मा से जोड़ता है।

योग के कई प्रकार और आसन होते हैं जो हमारे तन और मन को ही नहीं बल्कि हमारी आत्मा को भी स्वच्छ करते है। इसलिए योग शास्त्र में योगासन की परिभाषा इस प्रकार दी गई है कि, “शरीर को शुद्ध और स्वच्छ करने की प्रक्रिया में, शरीर को विभिन्न प्रकार की स्थितियों में रखा जाता है और उन्हीं स्थितियों को योगासन कहा जाता है।” योग के कई अंग कहे जाते हैं, और उनमें से प्राणायाम भी योग का ही एक अंग है। 

प्राणायाम को, श्वास और प्राणों का संतुलन या संयोजक कहा जा सकता है।

यदि संधि विच्छेद करें तो, प्राणायाम का अर्थ होता है, प्राण+ आयाम, प्राण का अर्थ है जीवन और आयाम का अर्थ है नियंत्रित करना।

इस प्रकार प्राणायाम को हम इस प्रकार परिभाषित कर सकते हैं कि,श्वसन के माध्यम से प्राणों पर नियंत्रण रखने की प्रक्रिया ही प्राणायाम है। भस्त्रिका प्राणायाम, नाडी शोधन प्राणायाम, कपालभाति प्राणायाम, उज्जायी प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम, बाहय प्राणायाम, अनुलोम-विलोम प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम, उदगीत प्राणायाम, सूर्य भेदन प्राणायाम, प्लाविनी प्राणायाम आदि प्राणायाम के प्रकार है।

योग शास्त्र में अनेक प्राणायाम है, जिनमें कपालभाति भी एक प्राणायाम भी है, जिसे श्वास संबंधी प्राणायाम भी कहा जाता है।

आज हम Kapalbhati के विषय में संपूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे। जैसे, कपालभाति क्या है, कपालभाति के कितने प्रकार है, कपालभाति प्राणायाम कैसे करें, तथा कपालभाति प्राणायाम कब करना चाहिए। साथ ही, हम कपालभाति प्राणायाम के लाभ (Benefits of Kapalbhati pranayam) और कपालभाति प्राणायाम करने के चरण। (Kapalbhati pranayam steps) इन प्रश्नों के उत्तर जानने की कोशिश करेंगे।



कपालभाति क्या है? – What is kapalbhati?

कपालभाति दो अलग-अलग शब्दों, कपाल और भाति से मिलकर बना है। कपाल का अर्थ है मस्तक या माथा और भाति मतलब होता है तेज या चमक। इस तरह कपालभाति का अर्थ हुआ, माथे पर का तेज जो कि अच्छे स्वास्थ्य की निशानी है। दूसरा अर्थ यह है कि मस्तिष्क को आंतरिक रूप से स्वच्छ करना, अर्थात ज्ञान की प्राप्ति करना, और बुद्धि की चमक बढ़ाना ही कपालभाति है।

Kapalbhati, एक प्रकार का प्राणायाम ही है। यह एक श्वास संबंधी प्राणायाम होता है।

कपालभाति करने से, पेट सहित, शरीर के सभी आंतरिक अंगों को बल मिलता है और उनका प्रक्षालन यानी स्वच्छता होती है।

अब बढ़ते हैं, हमारे अगले प्रश्न पर, कि Kapalbhati Pranayam कैसे करें तो चलिए देखते हैं।


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कपालभाती प्राणायाम कैसे करेंKapalbhati pranayam steps

कपालभाति प्राणायाम के लिए पहले 7 दिन 3 मिनट और फिर प्रतिदिन 5 मिनट पद्मासन, सुखासन अथवा वज्रासन में बैठें ( दोनों पैरों को आराम मिले उस स्थिति में) अपनी दोनों हथेलियों को खोलकर दोनों घुटनों पर रखें। पीठ को एकदम सीधा रखें। सांस ले और सांस छोड़ें, सांस छोड़ते समय पेट को अंदर ले। सांस लेते समय पेट की अंतड़ियां फूलनी चाहिए और सांस छोड़ते समय पेट की अंतड़ियों का संकुचन होना चाहिए।

केवल सांस छोड़ने पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करें। पेट पर, आपको जितना possible हो उतना ही जोर देना है। ऐसा एक साथ बीस बार करें, इस प्रकार पहला चरण पूरा होगा। इसी प्रकार अगला चरण पूरा करें। परंतु याद रखिए कि, कोई भी व्यायाम या योग प्रक्रिया, किसी विशेषज्ञ की देखरेख में ही शुरू करें। एक बार आपको आदत हो जाएं तो आप अपने आप भी कर सकते हैं। कपालभाति प्राणायाम में श्वासोच्छवास की प्रक्रिया से, सांस के द्वारा, शरीर के toxins बाहर निकलते हैं।



कपालभाति प्राणायाम करने के लाभ – Benefits of Kapalbhati

1. जैसा कि हमने देखा कि, कपालभाति यानी कि माथे का तेज। कपालभाति प्राणायाम करने से त्वचा में तेज आता है। और सुंदरता भी बढ़ती है।

2. कपालभाति प्राणायाम से, हमारे शरीर का Metabolism सही रहता है, जिससे खाएं गए अन्न का ऊर्जा में Conversion होता रहता है और हमारे शरीर की क्रियाशीलता बढ़ती है। जिससे हमारा वजन कम होता है या नियंत्रण में रहता है। पेट पर की बेकार चर्बी खत्म होकर, पेट की सुड़ोलता भी बढ़ जाती है।

3. कपालभाति प्राणायाम करने से हमारा Respiratory system यानी श्वसन तंत्र मजबूत होता है। शरीर के सभी अंगों को ज्यादा मात्रा में Oxygen supply होती है। जिससे अंगों की कार्य क्षमता भी बढ़ती है।

4. पेट की अंतड़ियों में होने वाले संकुचन से पेट के Muscles strong होते हैं और शरीर के Internal organs में ऊर्जा का निर्माण होता है, जिससे Diabetes के Patients को फायदा होता है।

5. शरीर के सभी अंगों में Blood circulation नियमित और अच्छा होता है जिससे त्वचा, निखरती है।

6. मन की अस्वस्थता कम होती है, और मन शांत और एकाग्रचित्त होता है।

7. कपालभाति प्राणायाम करने से, शरीर स्वस्थ रहता है और बुद्धि बल बढ़ता है।


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कपालभाति करते समय ध्यान रखने वाली सावधानियां

1. जैसा कि हमने देखा कि, दूसरे आसनों की तरह ही कपालभांति करते समय भी किसी विशेषज्ञ की सलाह और देखरेख जरुर ले।

2. कपालभाति प्राणायाम करने का सही समय सुबह का कहा गया है। इसलिए यह आसन, दिन के किसी अन्य समय में करने के बजाय, सुबह के समय ही करें।

3. जिन्हें, high blood pressure की समस्या है, वे कपालभाति प्राणायाम ना करें।

4. महिलाओं को Pregnancy और periods के समय कपालभाति प्राणायाम नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे पेट के muscles खिंचते है।

5. शरीर में किसी भी प्रकार की weakness है तो भी कपालभाति प्राणायाम ना करें। Slipped disc, Hernia, Heart problems हो या पेट का कोई operation हुआ हो तो भी कपालभाति प्राणायाम ना करें या फिर विशेषज्ञ की सलाह पर करें।

तो दोस्तों, यह थी कपालभाति प्राणायाम (kapalbhati pranayama in hindi) के विषय में कुछ आवश्यक जानकारी। कपालभाति प्राणायाम को कई लोग धरती की संजीवनी बूटी भी कहते हैं। आप भी नियमित रूप से इसे करने की आदत डालें। अपनी दिनचर्या में healthy diet के साथ योग को भी शामिल करें और हमेशा स्वस्थ रहें।


कल सुबह से ही कपालभाति प्राणायाम के (kapalbhati yoga benefits) फायदे लेना शुरू करे दें। कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास अपने डॉक्टर और योग शिक्षक से परामर्श करने के बाद ही करें। और हमे जरूर बताएं, आपको हमारा यह लेख कैसा लगा ?

Article by
Renuka Raje
Lifewingz.com

Image credit:- Canva, freepik

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