Maha Shivratri Story | महाशिवरात्रि से जुड़ी पौराणिक कथा

Maha Shivratri Story

Maha Shivratri Story:- शिव और शक्ति के विवाह की कथा महाशिवरात्रि के त्योहार से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण कथाओं में से एक है। आज की इस कहानी में हम आपको बताएंगे कैसे भगवान शिव ने अपनी दिव्य पत्नी शक्ति से दूसरी बार शादी की। शिव और शक्ति की कथा के अनुसार, जिस दिन भगवान शिव का पार्वती से विवाह हुआ था, उस दिन को शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है।

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एक बार भगवान शिव और उनकी पत्नी सती, राम कथा सुनकर ऋषि अगस्त्य के आश्रम से लौट रहे थे। जंगल के रास्ते में, शिव ने भगवान राम को अपनी पत्नी सीता की तलाश करते हुए देखा, जिसका लंका के राजा रावण ने अपहरण कर लिया था। 

भगवान शिव ने भगवान राम के प्रति श्रद्धा से अपना सिर झुकाकर प्रणाम किया। सती भगवान शिव के व्यवहार से हैरान थीं और सती ने भगवान शिव से पूछा कि वह क्यों राम जी को प्रणाम कर रहे हैं। फिर शिव ने सती को बताया कि राम जी भगवान विष्णु के अवतार है। सती, हालांकि, जवाब से संतुष्ट नहीं थीं और भगवान ने उन्हें खुद जाकर सच्चाई की पुष्टि करने के लिए कहा।

सती ने रूप बदलने के लिए अपनी शक्ति का उपयोग करते हुए, राम के सामने सीता का रूप धारण लिया। भगवान राम ने तुरंत देवी को पहचान लिया और पूछा, “देवी, तुम अकेली क्यों हो, शिव कहाँ हैं?” इस पर, सती को भगवान राम के बारे में सच्चाई का एहसास हुआ। 


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सीता भगवान शिव की माता के समान थीं और जब से सती ने सीता का रूप धारण किया, उनकी स्थिति बदल गई थी। उस समय से, शिव ने खुद को अपनी पत्नी सती से अलग कर लिया। सती भगवान शिव के परिवर्तन से दुखी थीं लेकिन फिर भी वह भगवान शिव के निवास कैलाश पर्वत पर रहती थी।

जब सती के पिता दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया, दक्ष ने सभी देवी देवताओं को यज्ञ में भुलाया। लेकिन सती और भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया। सती इस यज्ञ में शामिल होना चाहती थीं, और वे यज्ञ पर अकेली ही चली गईं। 

हालांकि, भगवान शिव ने उनको यज्ञ पर जाने से रोका था। दक्ष ने सती की उपस्थिति को नजरअंदाज कर दिया और सती को प्रसाद भी नहीं दिया। सती ने अपमानित महसूस करते हुए यज्ञ की आग में कूदकर आत्मदाह कर लिया।

सती के आत्मदाह की खबर सुनकर भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो गए। सती के शरीर को लेकर, शिव ने रुद्र तांडव करना शुरू किया और दक्ष के राज्य का सफाया कर दिया। हर कोई भयभीत था क्योंकि शिव के तांडव में पूरे ब्रह्मांड को नष्ट करने की शक्ति थी। भगवान शिव को शांत करने के लिए, विष्णु ने सती के शरीर को 12 टुकड़ों में काट दिया और उन्हें पृथ्वी पर फेंक दिया। 


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ऐसा कहा जाता है कि जहां भी शक्ति के शरीर के टुकड़े गिरे, वहां एक शक्ति पीठ उभरा, जिसमें असम में कामाख्या और उत्तर प्रदेश में विंध्यवासिनी शामिल हैं।

भगवान शिव अब अकेले थे और उन्होंने कठोर तपस्या की और हिमालय के लिए सेवानिवृत्त हुए। सती ने हिमालय के परिवार में पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया। उसने शिव के ध्यान को तोड़ने और उनका ध्यान जीतने के लिए तपस्या की।


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ऐसा कहा जाता है कि पार्वती ने भगवान शिव के ध्यान को तोड़ना के लिए कामदेव की मदद मांगी। कामदेव ने पार्वती को शिव के सामने नृत्य करने के लिए कहा। जब पार्वती ने नृत्य किया, तो कामदेव ने शिव की तपस्या को तोड़ते हुए एक तीर को शिव की और चला दिया। शिव अत्यंत क्रोधित हो गए और उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोली जिससे कामदेव जलकर राख हो गए। कामदेव की पत्नी रति की याचना के बाद ही भगवान शिव कामदेव को पुनर्जीवित करने के लिए सहमत हुए।

पार्वती ने शिव को पाने के लिए घोर तपस्या की। अंततः पार्वती ने शिव से विवाह करने को कहा। फाल्गुन के महीने में अमावस्या से एक दिन पहले उनका विवाह हुआ था। भगवान शिव और पार्वती मिलन के इस दिन को हर साल महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है।


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Image Credit:- Canva, Pixabay

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