A short moral story in hindi – पंचतंत्र की कहानी – कुम्हार का सच्चाई

short moral story in hindi

दोस्तों, आज मैं आपके बच्चों के लिए लेकर आई हूँ। A short moral story in hindi जिसमे बच्चों को सच बोलने की सिख मिलेगी। यह hindi story panchatantra से ली गई है। यह story in hindi for reading के लिए है। आप अपने बच्चों को आसानी से यहाँ से पढ़ कर यह panchtantra ki kahani hindi mai सुना सकती है।

 

एक समय की बात है। एक गाँव में एक गरीब कुम्हार रहता था। दिन में घड़े बेचकर पैसे कमाता और रात को उन्हीं पैसों की शराब पिया करता था। एक रात जब कुम्हार शराब के नशे में घर लौट रहा था।

रास्ते में बड़े पत्थर के साथ टकरा कर व सड़क पर गिर गया और सड़क पर गिरे हुए पत्थर, उसके माथे पर चुभ गए और माथे से खून निकलना शुरू हो गया। जैसे तैसे वह अपने घर पहुंचा और नशे की हालत में सो गया।

सुबह उठते ही कुमार वैद्य के पास गया और अपनी मलम पट्टी करवाई। वैद्य ने कुम्हार से कहा, “घाव बहुत गहरा है इसे भरने में काफी समय लगेगा, घाव भर तो जाएगा, लेकिन अपना निशान छोड़ देगा।”

 

कुछ दिनों बाद गांव में अकाल पड़ गया था, जिसके चलते गांव के लोग अपना घर बार छोड़कर दूसरे राज्य जाने लगे, कुम्हार भी उनके साथ दूसरे राज्य चल पड़ा।

कोई काम ना होने के कारण वह राजा के दरबार में अपने दोस्तों के साथ काम मांगने चल पड़ा। एक-एक करके सब लड़कों को राजा के सामने हाजिर किया।

राजा की नजर कुम्हार के माथे के निशान पर पड़ी इतना बड़ा निशान देख राजा ने सोचा कि अवश्य ही यह कोई शूरवीर योद्धा है। किसी युद्ध के दौरान ही इसके माथे पर यह चोट लगी है।

राजा ने उसे अपने राज्य के सबसे महत्वपूर्ण सैनिकों में से एक बनाने का फैसला किया। यह देख राजा के मंत्री और सिपाही कुम्हार से ईर्ष्या करने लगे। कुम्हार ने भी बड़े पद के लालच में राजा को सच नहीं बताया।

कुछ समय पश्चात अचानक पड़ोसी राज्य ने आक्रमण कर दिया राजा ने अपने सभी सैनिकों को बुलाया और युद्ध लड़ने के लिए उन्हें हथियार सौंप दिए। चूंकि कुम्हार असली सैनिक नहीं था, इसलिए वह जाने से डरता है।

कोई अन्य विकल्प न देखकर, कुम्हार राजा के पास गया और उसे सच्चाई बताई कि महाराज, यह निशान मुझे युद्ध में नहीं मिला है, मैं तो एक मामूली गरीब कुम्हार हूं।

एक दिन जब मैं शराब पीकर घर आ रहा था तो रास्ते में बड़े पत्थर के साथ टकरा कर मैं सड़क पर गिर गया और सड़क पर गिरे हुए पत्थर, उसके माथे पर चुभ गए। जिससे घाव गहरा हो गया और यह निशान बन गया।

राजा क्रोधित हुआ और उसने आदेश दिया कि कुम्हार को दंड दिया जाए। राजा ने कुम्हार को पद से हटा दिया और उसे राज्य से भी निकल जाने का आदेश दिया। कुम्हार ने राजा से निवेदन किया कि वह युद्ध लड़ेगा।

 

लेकिन राजा ने उसकी एक बात भी नहीं सुनी और राजा ने उसे कहा कि तुम में एक सैनिक होने के गुण हो सकते हैं। लेकिन तुमने छल किया और कपट से यह पद पाया। बेहतर यह ही होगा की तुम चले जाओ वर्ना लोगों को तुम्हारा सच पता चलेगा तो जान से मारे जाओगे।

कुम्हार को एहसास हुआ कि राजा क्या कहना चाह रहा था। कुम्हार निराश होकर राज्य छोडकर चला गया।

 

सीख: इंसान का झूठ ज्यादा दिन तक छुप नहीं सकता, एक न एक दिन सच सामने आता ही है। जिससे सब से ज्यादा दुःख उस इंसान को होता है जो आँख बंद करके आप पर विश्वास करता है।

 


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By:- Meenakshi

 

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धन्यवाद!

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