Home Remedy for Menstruation Cramps – पीरियड के दर्द से राहत दिलाएंगे, ये आसान उपाय

Home Remedies for Menstruation Pain

Home Remedies for Menstruation Pain: आज के इस लेख में आप पढ़ने जा रहे है महिलाओं से जुड़ी मासिक धर्म की समस्या, जिसे हम Menstruation problem और Period problem भी कहते है।



वैसे तो हर महिला इसे अपने हिसाब से डील करती है। लकिन कई बार यह समस्या ज्यादा बढ़ जाती और एक अलग रूप ले लेती है। जिसकी वजह से हमे डॉक्टर के पास भी जाना पड़ता है। आज के इस लेख में हम आपको मासिक धर्म के दौरान होने वाली पेट दर्द के बारे में पूरी जानकारी देंगे और साथ ही आपको पीरियड में दर्द का घरेलू इलाज (home remedies for menstrual pain) बताएंगे।

मासिक धर्म यानी कि period, महिलाओं के शरीर में होने वाली सामान्य शारीरिक प्रक्रिया ही है। पीरियड से जुड़ी problems महिलाओं के लिए कोई नई बात नहीं है। जिस प्रकार हर महिला की शारीरिक क्षमता अलग-अलग होती है, उसी प्रकार पीरियड की समस्याओं को हेंडल करने की क्षमता भी सब में अलग-अलग होती है।

लेकिन कुछ महिलाओं को period के दौरान बहुत ज्यादा दर्द होता है और कई बार तो किसी विशेषज्ञ की सलाह भी लेनी पड़ती है।

पीरियड के दौरान, महिलाओं के शरीर में कई परिवर्तन होते हैं। जिनकी वजह से उनके शरीर में शारीरिक और मानसिक दोनों ही स्तरों पर इसका प्रभाव पड़ता है। इसिलिए पीरियड के समय महिलाओं को आराम की बहुत जरूरत होती है।

लेकिन आज के दौर में, जो महिलाएं घर से बाहर निकलकर काम करती हैं, उनके लिए यह संभव नहीं है। उनके लिए पीरियड की समस्याएं और दर्द, एक बड़ी चुनौती बन जाता है।

महिलाओं को पीरियड के दौरान समस्याएं होती ही है। कभी कम तो कभी ज्यादा। पीरियड के समय होने वाला दर्द और अन्य समस्याएं, उम्र के हर पड़ाव पर अलग अलग स्वरुप की होती है।

पीरियड में, पेट दर्द, पीठ दर्द, कमर दर्द, सिर दर्द, हाथ पैर या पूरे शरीर में दर्द, एंठन, मिचली, चक्कर, मुड़ स्विंग, गुस्सा, तनाव इत्यादि समस्याएं होना, बिल्कुल आम बात है। और अधिकांश महिलाओं को, पीरियड के दौरान यह सभी समस्याएं होती ही है। लेकिन यह सामान्य समस्याएं कभी-कभी असामान्य और असहनीय दर्द में बदल जाती है।

आज हम पीरियड के दौरान होने वाले दर्द के विषय में चर्चा करेंगे। और इनके कारण, लक्षण और घरेलू उपचार के बारे में जानेंगे। और साथ ही, किन परिस्थितियों में आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए यह भी देखेंगे।

पीरियड के दौरान दर्द होने के कारण – Causes of Period Pain

1. पीरियड के दौरान, महिलाओं का metabolism कम हो जाता है, जिससे पेट में गैस बनती है और दर्द के साथ-साथ तकलीफ और भी बढ़ जाती है। लेकिन यह बिल्कुल सामान्य बात है।

2. कभी कभी irregular periods होने से भी पीरियड के समय बहुत दर्द होता है।

3. Excessive bleeding की वजह से भी दर्द ज्यादा होता है।

4. जब uterus में गांठ हो जाती है या फिर गर्भनाल में सूजन आ जाती है तब भी कई महिलाओं को, पेट में तेज दर्द और मरोड़ के साथ Excessive bleeding होती है।

5. पीरियड के दौरान, ज्यादा और अधिक मेहनत वाले काम करने से भी शरीर में दर्द और कमज़ोरी महसूस होती है। यदि आपका पीरियड बहुत ज्यादा गेप के बाद आता है, तो भी दर्द ज्यादा होता है।

6. कुछ महिलाओं के लिए, पीरियड का दर्द सहन करना बहुत मुश्किल हो जाता है। इस समस्या को, डिसमेनोरिया (Dysmenorrhoea) कहते हैं, जिसका हिंदी नाम कष्टार्तव है। इस समस्या में, महिलाओं को पेट में या pelvic area में तेज असहनीय दर्द होता है। इस समस्या को नजरंदाज ना करें।

डिसमेनोरिया, दो प्रकार का होता है:-
– प्राथमिक डिसमेनोरिया ( Primary Dysmenorrhoea)
– सेकेंडरी डिसमेनोरिया (Secondary Dysmenorrhoea)

Primary Dysmenorrhoea में आपको पेट, पीठ और thighs इत्यादि में normal pain महसूस होता है, जो पीरियड आने के दो-तीन दिन पहले शुरू हो सकता हैं और पीरियड के दो-तीन दिनों बाद बंद हो जाता है। यह कोई गंभीर बिमारी नहीं है।

Secondary Dysmenorrhoea में आपको गर्भाशय में गांठ, infection या कोई विकृति हो सकती है। इसलिए इसका उपचार करना जरूरी होता है। इनके अलावा ग्रंथिपेश्यर्बुदता रोग (Adenomyosis) जो गर्भाशय (uterus) के अंदर होने वाली एक आम बिमारी है, जो सामान्यतः मध्य आयु की महिलाओं को होती है।

इसमें भी महिलाओं को पीरियड के समय पेट में अत्यधिक ऐंठन, मरोड़ तेज दर्द और बहुत ज्यादा bleeding होता है। हालांकि यह बीमारी, सही उपचार से ठीक हो जाती है।


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2 पीरियड में दर्द के लक्षण – Symptoms of period pain

आमतौर पर पीरियड में कुछ pain तो सामान्य रूप से हर महिला को होता है, लेकिन Dysmenorrhoea, Adenomyosis या अन्य कोई internal problem होने पर महिलाओं में ये सभी लक्षण दिखाई देते हैं।

1. Period के समय पेट में या pelvic area में excessive pain या मरोड़ होना।

2. Lower back pain, headache या thighs में pain।

3. Breast में heaviness और pain।

4. Uterus के अंदर मरोड़ जैसा उठना।

5. Constipation, Acidity या loose motions होना।

6. पेट में pressure महसूस होना और गैस ज्यादा बनना।

7. मितली, उल्टी या चक्कर आना, बेहोश होना।

8. बेवजह चिंता, बेचैनी, गुस्सा, चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ना।

9. Sexual relationship से डर लगना।

10. Weakness महसूस होना।

ये सभी लक्षण पीरियड के दौरान महिलाओं में दिखाई देते हैं। जो अत्यधिक मानसिक और शारीरिक कष्ट का कारण बनते हैं। हालांकि इन सभी का Ayurveda, Homeopathy और Allopathy में treatments भी बताए गए है।

पीरियड में दर्द को कम करने के घरेलू उपचार – Home Remedies for Menstruation Pain

महिलाओं में दर्द सहने की क्षमता, पुरूषों के मुकाबले अधिक होती है। इसलिए कभी-कभी वह अपने शरीर में होने वाले छोटे मोटे दर्द को नजरंदाज कर देती है, पीरियड की समस्याओं को तो वैसे ही नैसर्गिक समझा जाता है। और सामान्यतः हम उनका उपचार घर में ही कर लेते हैं। देखते हैं कि पीरियड में दर्द होने पर हमें क्या उपाय करने चाहिए।

1. सबसे पहले तो अपने खान-पान में ऐसी वस्तुएं बिल्कुल भी ना लें जिनसे कब्ज की समस्या होती है। इसके बजाय, खूब सारे fresh fruits, fruit juice, fresh vegetables, salads, pulses आदि खाएं। गाजर का juice पिएं।

2. ऐसे पदार्थों का सेवन करें जिनसे आपको folic acid, calcium, omega 3 fatty acids, magnesium और iron ज्यादा मिलेगा। Nonveg और गरिष्ठ भोजन से दूर रहे।

3. पानी पीना सेहत के लिए बहुत लाभकारी है, इसलिए खूब पानी पिएं। अजवायन को पानी में उबालकर पिएं।

4. तुलसी व अदरक की चाय या हल्दी वाला गर्म दूध पिएं।

5. तील ( sesame ) का सेवन करें।

6. हल्का-फुल्का व्यायाम करें।

7. गर्म पानी से पेट की सिकाई करें। और गुनगुना पानी पिएं। हल्के हाथों से पेट की मालिश करें, हिंग का लेप लगाएं।

8. Constipation दूर करने के लिए पपीते का सेवन करें।

9. बहुत ज्यादा नमक, शक्कर ना खाएं और caffeine युक्त पदार्थों और alcohol से दूर ही रहे।

10. यदि इन सबसे राहत ना मिले तो, डॉक्टर के पास जाएं। लेप्रोस्कोपी, अल्ट्रासाउंड, सिटी स्कैन व एम आर आई से समस्या का हल निकाला जा सकता है।

11. Mental health का ध्यान रखें। अच्छा और positive सोचें, अपने मनपसंद काम करें, जिन बातों और विचारों से चिंता या तनाव हो उनसे दूर रहें। अच्छी किताबें पढ़ें और light music सुनें। meditation, exercise और yoga करें।


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किन परिस्थितियों में डॉक्टर के पास जाना चाहिए – When should go to the Doctor

आमतौर पर महिलाएं, जब तक उनकी शारीरिक समस्या गंभीर रूप धारण नहीं कर लेती है, तब तक डॉक्टर के पास नहीं जाती है। हालांकि इसके कई कारण होते हैं। लेकिन फिर भी, अपनी किसी भी physical या mental problems के लिए, महिलाओं को जब घरेलू उपायों से बिल्कुल भी राहत ना मिले तो तुरंत ही डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

पीरियड से संबंधित अधिकांश समस्याओं को घरेलू उपचार के द्वारा ठीक किया जा सकता है, लेकिन डिसमेनोरिया या एडेनोमायोसिस जैसे diseases को बढ़ने से पहले ही रोक देना चाहिए। इसके लिए केवल घरेलू उपचार करने के साथ-साथ डॉक्टर की advice भी लेनी चाहिएं।



Conclusion:- दोस्तों, हर औरत के उपर उसके पूरे परिवार की health और happiness टिकी हुई होती है। ऐसे में उनका स्वयं के प्रति भी कोई duty होती है। इसलिए सबके साथ-साथ खुद का भी ध्यान रखें, और healthy रहें और सबको, healthy रखें। साथ ही हम आपको यह सलाह भी देंगे कि कोई भी घरेलू उपाय आजमाने से पहले problem की गंभीरता, अपनी हेल्थ और मेडिकल कंडीशन का ध्यान रखें। और जरूरत होने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लें। यह article आपको कैसा लगा कमेंट सेक्शन में बताइएगा।

By:- Renuka Raje
Lifewingz.com
Image credits:- Canva.com,

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